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RTI कार्यकर्ता बन बिल्डरों से वसूली, गिरोह पर मकोका; मुख्य आरोपी गिरफ्तार

नवी मुंबई पुलिस ने RTI कार्यकर्ता बनकर बिल्डरों से वसूली करने वाले गिरोह पर मकोका लगाया है। पुलिस मुख्य आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

Maharashtra News

प्रतीकात्मक तस्वीर। (Photo Credit: ChatGPT)

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नवी मुंबई में खुद को RTI कार्यकर्ता बताकर बिल्डरों से वसूली करने का मामला सामने आया है। यह वसूली एक गिरोह बनाकर की जा रही थी। नवी मुंबई पुलिस ने इस गिरोह पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम ( मकोका) लगाया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य रियल एस्टेट डेवलपर्स को धमकाते थे और उनसे पैसे ऐंठते थे। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी त्रिभुवन लालबिहारी सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। उसका बेटा भी मामले में आरोपी है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

 

पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने नवी मुंबई के दीघा में रहने वाले 52 साल के एक बिल्डर से कथित तौर पर 1.35 लाख रुपये वसूले थे। बिल्डर ने इस मामले में लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद 29 सितंबर को रबाले पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया। जांच के दौरान पुलिस को मुख्य आरोपी के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी मिली। इसके आधार पर गिरोह के खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई की गई।

21 अक्टूबर को मिली मकोका लगाने की मंजूरी

संयुक्त पुलिस आयुक्त दीपक सकोरे ने 21 अक्टूबर को आरोपियों के खिलाफ मकोका की धारा 23(1)(क) के तहत अभियोजन चलाने की मंजूरी दी। पुलिस के अनुसार आरोपी बिल्डरों को ब्लैकमेल करते थे। उन्हें धमकाकर पैसे वसूलने का आरोप है। इस गिरोह का मुख्य आरोपी अब पुलिस के गिरफ्त में है और बाकी आरोपियों की तलाश है।

 

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बिल्डर की शिकायत पर दर्ज हुआ था केस

यह मामला एक बिल्डर की लिखित शिकायत के बाद दर्ज किया गया था। बिल्डर की कई निर्माण परियोजनाओं पर काम चल रहा है। शिकायत के आधार पर रबाले पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 308(5), 351(2), 352 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया था। ये धाराएं रंगदारी, आपराधिक धमकी, जानबूझकर अपमान करने और साझा इरादे से जुड़े अपराधों से संबंधित हैं।

 

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मुख्य आरोपी पर पहले से सात गंभीर मामले

पुलिस ने बताया कि त्रिभुवन सिंह के खिलाफ रबाले, रबाले एमआईडीसी, कलवा और दूसरे पुलिस थानों में पहले भी मामले दर्ज हुए हैं। पिछले एक दशक में उसके खिलाफ कम से कम सात गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, यह रिकॉर्ड गिरोह की लगातार गैरकानूनी गतिविधियों की ओर इशारा करता है। इसी आधार पर आरोपियों के खिलाफ मकोका लगाने का फैसला किया गया।


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