सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुरुग्राम में चल रही तोड़फोड़ (डिमोलिशन) ड्राइव के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करने को कहा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमलया बागची की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को आज ही हाईकोर्ट में तत्काल मेंशन करने की इजाजत दे दी। बेंच ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वह दोपहर 1 बजे या लंच के बाद 1:45 बजे याचिका को सुनें।
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बिना नोटिस के घर तोड़ने का आरोप
याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट में कहा कि स्थानीय अधिकारी हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश की गलत व्याख्या करके बिना कोई नोटिस दिए लोगों के घर तोड़ रहे हैं। बेंच ने कहा कि अगर हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या हो रही है तो याचिकाकर्ताओं को सीधे हाईकोर्ट जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की, 'अगर हाईकोर्ट अपने संवैधानिक कर्तव्य के तहत अनधिकृत निर्माणों को रोकने या हटाने का अभियान चला रहा है, तो हम शीर्ष अदालत के रूप में इसमें बाधा क्यों डालें?'
स्टेटस क्वो की मांग की थी
वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि हाईकोर्ट ने तोड़फोड़ के बारे में कुछ नहीं कहा था। उन्होंने कोर्ट से तीन-चार दिनों के लिए स्टेटस क्वो (सब कुछ पहले जैसा रखने) का आदेश देने की मांग की, ताकि वे हाईकोर्ट जा सकें।
उन्होंने दावा किया कि यह पूरी तरह कानूनी रूप से सुसंगत निर्माण हैं और याचिकाकर्ता आम निवासी हैं। अधिकारियों ने उन्हें कोई शो-कॉज नोटिस भी नहीं दिया।
हाई कोर्ट ने लगाई थी रोक
बता दें कि 2 अप्रैल को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की ‘स्टिल्ट प्लस चार मंजिला’ इमारत नीति पर रोक लगा दी थी। इस नीति से स्टिल्ट पार्किंग के ऊपर चार मंजिलें बनाने की इजाजत दी गई थी। हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा था कि राज्य सिर्फ ज्यादा राजस्व कमाने के लिए लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है।
यह अंतरिम आदेश जुलाई 2024 के एक सरकारी आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर आया था। उस आदेश में पहले ‘स्टिल्ट प्लस तीन मंजिल’ की सीमा को बढ़ाकर चार मंजिल कर दिया गया था। साथ ही बिना मंजूरी वाले प्लान के लिए भी कंपोजिशन (जुर्माना देकर मंजूरी) का प्रावधान किया गया था।
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सरकार ने शुरू किया था कैंपेन
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद हरियाणा सरकार ने अनधिकृत निर्माणों और अतिक्रमणों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया, जिसकी शुरुआत गुरुग्राम से हुई। सुप्रीम कोर्ट ने अब याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट में ही राहत मांगने को कहा है।