हरियाणा में बिजली के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी तीन दिन से हड़ताल कर रहे थे। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण राज्यभर में कई जगहों पर बिजली की सप्लाई रूक गई जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों से बातचीत के लिए आज 23 अक्टूबर को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, ऊर्जा मंत्री अनिल विज और अन्य अधिकारियों के साथ कर्मचारियों की बैठक हुए। इस बैठक के बाद अब कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म कर दी है।
सरकार के सरकार ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि वह बिजली क्षेत्र में निजीकरण के पक्ष में नहीं है और निजी कंपनी को दिए गए बिजली वितरण लाइसेंस के खिलाफ कानूनी कदम उठाएगी। सरकार के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने काम पर लौटने और बिजली आपूर्ति बहाल करने का ऐलान किया। यह विवाद हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) की ओर से गुरुग्राम और नूंह में एक निजी कंपनी को बिजली बांटने के लिए 25 साल का लाइसेंस दिए जाने के बाद शुरू हुआ था।
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क्या है पूरा विवाद?
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए 25 साल का समानांतर लाइसेंस दिया था। इसका मतलब है कि सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के साथ एक निजी कंपनी को भी इन इलाकों में बिजली बांटने की अनुमति मिल सकती है। अभी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी संभालता है।
बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों को आशंका थी कि निजी कंपनी के आने से सरकारी बिजली व्यवस्था कमजोर होगी और धीरे-धीरे निजीकरण का रास्ता खुलेगा। कर्मचारियों का कहना था कि औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों जैसे ज्यादा कमाई वाले उपभोक्ता निजी कंपनी के पास चले गए, तो सरकारी निगम की आमदनी पर असर पड़ सकता है। इससे कर्मचारियों की नौकरियों और आम उपभोक्ताओं के हितों को लेकर भी चिंताएं बढ़ेंगी।
लोगों को हुई परेशानी
निजी कंपनी को लाइसेंस दिए जाने के विरोध में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त संघर्ष मोर्चे ने 21 अक्टूबर की रात से हड़ताल शुरू की थी। इसका असर गुरुग्राम, नूंह और हरियाणा के दूसरे इलाकों में भी देखने को मिला। कई जगह बिजली आपूर्ति बाधित हुई, बिजली की खराबी ठीक करने का काम प्रभावित हुआ और लोगों को पानी की किल्लत का भी सामना करना पड़ा। इनवर्टर की बैटरियां जवाब देने लगीं और लोगों को मोबाइल चार्ज करने तक में परेशानी हुई।
बिजली पर निर्भर उद्योगों और कारोबार पर भी असर पड़ा। कर्मचारियों का तर्क था कि जब तक निजी लाइसेंस के फैसले पर कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा। दूसरी ओर, सरकार ने हड़ताल से आम लोगों को होने वाली परेशानी को देखते हुए कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की थी।
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सरकार ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी चिंताओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार बिजली क्षेत्र में निजीकरण के पक्ष में नहीं है और उपभोक्ताओं तथा कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना चाहती है। सरकार ने कहा कि वह विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत हरियाणा विद्युत नियामक आयोग को निर्देश देने और संबंधित आदेश की समीक्षा के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाएगी।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी कहा कि सरकार ने निजी कंपनी को लाइसेंस देने के लिए आवेदन नहीं मांगे थे। आवेदन निजी कंपनी ने कानून में उपलब्ध प्रावधानों के तहत सीधे आयोग के सामने किया था। मुख्यमंत्री के साथ बातचीत के बाद कर्मचारी नेताओं ने हड़ताल वापस लेने और तत्काल काम पर लौटने की घोषणा कर दी है।