हिमाचल प्रदेश: कर्मचारियों को DA, पेंशनरों को जल्द मिलेगा 35% एरियर, CM का ऐलान
हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुजुर्ग पेंशनरों के लंबित बकाए चुकाने का ऐलान किया है। साथ ही CM ने 800 मछुआरों को 3500-3500 रुपये की वित्तीय सहायता दी है।

CM सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ मछुआरा परिवार, Photo Credit- Social Media
हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों, पेंशनरों और मछुआरा परिवारों के लिए राज्य सरकार की तरफ से बड़ी राहत मिली है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुजुर्ग पेंशनरों के लंबित बकाए चुकाने का ऐलान किया है। साथ ही 800 मछुआरा परिवारों को सीधे आर्थिक सहायता भी पहुंचाई। किशाऊ बांध और जेएसडब्ल्यू मामले में मिली कानूनी जीत से राज्य को हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय का रास्ता भी खुल गया है, जिसे सरकार देहरा जैसे क्षेत्रों में विकास कार्यों में लगाने का दावा कर रही है।
CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि भाजपा केवल कर्मचारियों और पेंशनरों के नाम पर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि 67 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों को पूरे बकाया, लीव एनकैशमेंट और ग्रेच्युटी का भुगतान कर दिया गया है। घोषणा की कि 1 जनवरी, 2016 से 31 जनवरी, 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को उनके वेतन बकाया के अतिरिक्त 20,000 रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।
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लंबित बकाया का 35 प्रतिशत भुगतान
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रेणी-Ⅰ, श्रेणी-Ⅱ और श्रेणी-Ⅲ के पेंशनरों के लिए बेसिक पे से संबंधित शर्त को हटाने के निर्देश जारी किए जाएंगे। इस शर्त को हटाए जाने के बाद सभी पात्र पेंशनरों को उनके लंबित बकाया का 35 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस भुगतान के साथ कर्मचारियों के कुल बकाया का 57 प्रतिशत हिस्सा चुकता हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आने वाले समय में कर्मचारियों को महंगाई भत्ता प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये निर्णय राज्य सरकार की वित्तीय सूझबूझ, राजकोषीय अनुशासन और जिम्मेदार वित्तीय प्रबंधन के कारण संभव हुए हैं।
इसके अलावा, कांगड़ा जिले के देहरा में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि’ के तहत 800 मछुआरों को 3,500 रुपये प्रति व्यक्ति की वित्तीय सहायता के चेक वितरित किए। यह सहायता प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में स्थानांतरित की गई है।
हिमाचल प्रदेश के अधिकारों के लिए लड़ रही राज्य सरकार
मुख्यमंंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के अधिकारों के लिए लड़ रही है और भ्रष्टाचार के रास्ते बंद करने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने के बावजूद सरकार वित्तीय सूझबूझ और अनुशासन के माध्यम से कर्मचारियों और पेंशनरों को वित्तीय लाभ सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार में शामिल सभी लोगों से उनकी अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों का ब्यौरा मांगा जाएगा। ऐसी संपत्तियों को जब्त कर गरीबों में वितरित किया जाएगा।
सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने किशाऊ बांध परियोजना में हिमाचल प्रदेश के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है, जिससे राज्य को हर वर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। इसी प्रकार, जेएसडब्ल्यू मामले में सर्वोच्च न्यायालय में राज्य की जीत के बाद हिमाचल प्रदेश को अब सालाना लगभग 150 करोड़ रुपये की आय हो रही है। राज्य सरकार ने पूर्व भाजपा सरकार द्वारा अपनाई गई शराब ठेकों के नवीनीकरण की व्यवस्था को बंद कर दिया है और इसके बजाय शराब ठेकों की नीलामी करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से राज्य को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उन्होंने पदभार संभाला था, तब वर्तमान राज्य सरकार को 76,707 करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ के साथ-साथ लगभग 10,000 करोड़ रुपये की कर्मचारी देनदारियां विरासत में मिली थीं। हिमाचल प्रदेश को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बंद किए जाने के बाद भाजपा के सांसद और विधायक, प्रधानमंत्री के समक्ष इसे बहाल करने का मुद्दा तक प्रभावी ढंग से नहीं उठा सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने शिमला में भूमिगत यूटिलिटी डक्ट के निर्माण का कार्य शुरू किया है और इसी तरह का कार्य देहरा में भी किया जाएगा।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधा
उन्होंने कहा कि कांगड़ा को हिमाचल प्रदेश की पर्यटन राजधानी घोषित किया गया है और बनखंडी में 619 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय स्तर का जूलॉजिकल पार्क विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना पर 150 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि 100 करोड़ रुपये और जारी किए गए हैं। उन्होंने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए देहरा अस्पताल में एक वर्ष के भीतर अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित करने की घोषणा की।
देहरा विधानसभा क्षेत्र में 100 करोड़ रुपये की लागत वाली पेयजल परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। ओजोन तकनीक आधारित पेयजल परियोजना भी अगले एक वर्ष के भीतर पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि उसकी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि मछली पर रॉयल्टी को 15 प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत कर दिया गया है। मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि के दौरान मछुआरों को 3,500 रुपये प्रति व्यक्ति वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
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राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र
देहरा विधानसभा क्षेत्र में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व एक निर्दलीय विधायक कर रहे थे, तब भी उन्होंने बिना किसी भेदभाव के विकास सुनिश्चित किया। उन्होंने कहा कि मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि निर्दलीय विधायक बाद में निर्वाचित सरकार को गिराने की साजिश में शामिल हो जाएंगे, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम अंतत देहरा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुए।
उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी कमलेश ठाकुर की कभी भी चुनावी राजनीति में आने की इच्छा नहीं थी। हालांकि, पार्टी हाईकमान ने एक सर्वेक्षण के आधार पर उन्हें टिकट दिया और बताया कि उनके जीतने की संभावना है, हालांकि जीत निश्चित नहीं थी। उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार निर्दलीय विधायकों ने अपनी इस्तीफे स्वीकार करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पौंग बांध विस्थापितों की समस्याओं से पूरी तरह अवगत है। पहले कई विस्थापित परिवारों के लिए बोनाफाइड प्रमाणपत्र प्राप्त करना भी मुश्किल था। उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकार ने ऐसे 200 विस्थापित परिवारों को मकान बनाने के लिए भूमि उपलब्ध करवाई है और अन्य पात्र विस्थापित परिवारों को भी समय के साथ इस योजना के दायरे में लाया जाएगा।
विधायक कमलेश ठाकुर ने क्या कहा?
विधायक कमलेश ठाकुर ने कहा कि आज का दिन केवल ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि’ के तहत वित्तीय सहायता वितरित करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह उन मछुआरा परिवारों की मेहनत को पहचानने और सम्मानित करने का अवसर भी है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने परिवारों को मजबूत बनाने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे मछुआरों की मेहनत न केवल उनके परिवारों की आय बढ़ाती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है। इसलिए आज दी जा रही सहायता केवल वित्तीय सहयोग नहीं है, बल्कि यह उनके श्रम और योगदान के प्रति सम्मान और पहचान का प्रतीक है।
मछुआरों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने मछुआरा समुदाय की जरूरतों और योगदान को समझते हुए उनके कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देहरा में कई बड़ी विकास परियोजनाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा ‘हमारा सपना है कि आने वाले वर्षों में देहरा हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक के रूप में उभरे।’
उन्होंने कहा कि देहरा में विकास की एक नई तस्वीर सामने आ रही है। शिक्षा, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे में हो रही प्रगति क्षेत्र में बदलते परिदृश्य का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने कहा कि देहरा के लिए आवंटित कुल बजट का 60 प्रतिशत से अधिक सीधे ग्राम पंचायतों को आवंटित किया गया है, ताकि गांवों में सड़कों, रास्तों और स्थानीय पेयजल योजनाओं से संबंधित विकास कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण किए जा सकें।
इस अवसर पर राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी पठानिया, विधायक संजय रतन, पूर्व मंत्री एवं हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान, पूर्व विधायक योगराज, विभिन्न बोर्डों एवं निगमों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, सचिव प्रियंका बसु इंग्टी, उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक संदीप धवल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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