हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के गगल एयरपोर्ट के विस्तार होगा। साथ ही पूरा इलाका भी नए शहरी और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने की तैयारी में है। हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने गगल एयरपोर्ट के निकट 65 हेक्टेयर क्षेत्र में एयरोसिटी विकसित करने की योजना बनाई है। सरकार की स्वीकृति के बाद इसके लिए चार गांवों में भूमि चिन्हित कर ली गई है। प्रोजेक्ट का कॉन्सेप्ट नोट और ड्राइंग तैयार कर सैद्धांतिक स्वीकृति के लिए भेज दी गई है।
एयरोसिटी के लिए जुगेहड़, भदोट, बंडी खास और बंडी खुर्द में करीब 65 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर इस भूमि के अधिग्रहण पर करीब 122.32 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। राज्य मंत्रिमंडल ने इस परियोजना को 30 मई 2026 को मंजूरी दी थी।
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सरकार की योजना के तहत एयरोसिटी को प्लांड अर्बन एरिया के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसका अर्थ केवल एयरपोर्ट के आसपास कुछ व्यावसायिक भवन बनाना नहीं होगा, बल्कि यहां पर्यटन, होटल, कारोबार, परिवहन और अन्य सुविधाओं को एक सुनियोजित शहरी ढांचे के साथ विकसित करने की संभावना है। जिलाधीश कांगड़ा अब संबंधित भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया लैंड एक्विजिशन एक्ट-2013 के तहत आगे बढ़ा रहे हैं। परियोजना के विकास और निर्माण से संबंधित कॉन्सेप्ट नोट और ड्राइंग तैयार हो चुकी है, जिसे सैद्धांतिक स्वीकृति के लिए प्रदेश सरकार को भेजा गया है। इसके बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से भी आवश्यक अनुमति ली जाएगी।
एयरोसिटी बनी तो क्या बदलेगा?
गगल एयरपोर्ट के विस्तार और एयरोसिटी के विकास को एक साथ देखा जाए। इसका असर कांगड़ा के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक हो सकता है। एयरपोर्ट के आसपास होटल, रेस्तरां, कॉन्फ्रेंस और बिजनेस सुविधाएं, शॉपिंग, ट्रांसपोर्ट तथा पर्यटन से जुड़ी सेवाओं के लिए नया बाजार विकसित होने की संभावना है।
इससे धर्मशाला मैक्लोडगंज, पालमपुर और कांगड़ा आने वाले पर्यटकों के लिए एयरपोर्ट के आसपास ही आधुनिक सुविधाओं का एक नया केंद्र तैयार हो सकता है। वहीं, पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।एयरोसिटी के विकसित होने से आसपास के गांवों की जमीन और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।
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एयरपोर्ट विस्तार भी अंतिम चरण
दूसरी तरफ गगल एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी लगभग अंतिम चरण में पहुंच गई है। एयरपोर्ट के निर्माण से संबंधित टेक्नो-इकोनॉमिक रिपोर्ट एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को भेजी जा चुकी है। डीपीआर को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से उठाई गई आपत्तियों का भी समाधान कर दिया गया है।
ऐसे में आने वाले समय में गगल एयरपोर्ट का विस्तार और उसके साथ प्रस्तावित एयरोसिटी कांगड़ा को हिमाचल के एक बड़े एयर-कनेक्टेड पर्यटन और आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।