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हर साल 8 हजार करोड़ रुपये की कमी, हिमाचल के CM सुक्खू ने केंद्र से मांगी मदद

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की, उन्होंने 8 हजार करोड़ के वित्तीय अंतर से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश के लिए क्रेंद से आर्थिक मदद मांगी है।

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और हिमाचल के CM सुखविंदर सिंह सुक्खू, Photo Credit-Social Media

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हिमाचल प्रदेश को केंद्र से मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान अब बंद हो गया है। इसकी वजह से राज्य को हर साल करीब 8,000 करोड़ रुपये की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस कमी को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार से बड़ी आर्थिक मदद मांगी है। मंगलवार को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 से राजस्व घाटा अनुदान पूरी तरह बंद हो गया है। इससे प्रदेश को लगभग 8,000 करोड़ रुपये का वार्षिक वित्तीय अंतर झेलना पड़ रहा है। पिछले वर्षों में राजस्व घाटा अनुदान में लगातार कमी किए जाने से भी राज्य के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। 

 

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पहाड़ की अर्थव्यवस्था का खर्च मैदान से ज्यादा 

मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री के सामने हिमाचल की भौगोलिक मजबूरियों को प्रमुखता से रखी, उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी ढांचे को बनाने और रखरखाव की लागत मैदानी राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है। इसके अलावा हिमाचल प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से भी अत्यधिक संवेदनशील है, जिससे सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कम संसाधनों के बावजूद राज्य सरकार राजस्व बढ़ाने और वित्तीय सुधारों की दिशा में लगातार कदम उठा रही है लेकिन प्राकृतिक आपदाओं से हुए भारी नुकसान और राज्य की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र की अतिरिक्त मदद जरूरी है।

उधार सीमा 3 से बढ़ाकर 4 फीसदी करने की मांग

मुख्यमंत्री ने केंद्र से हिमाचल की उधार लेने की सीमा सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी (GSDP) के मौजूदा 3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य को अतिरिक्त वित्तीय गुंजाइश मिलेगी, प्रतिबद्ध देनदारियों के साथ-साथ जरूरी सार्वजनिक सेवाओं और विकास योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।

 

मुख्यमंत्री ने राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना (SASCI) के तहत आपूर्ति और  विक्रेता भुगतानों को SNA-स्पर्श मॉडल से छूट देने की मांग भी रखी। इसके साथ ही बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए हिमाचल को मिलने वाली सहायता बढ़ाने और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अधिक बुनियादी ढांचा लागत को देखते हुए इस सहायता को दोगुना करने का अनुरोध किया।

केंद्र ने दिया भरोसा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री की मांगों पर राज्य की वित्तीय जरूरतों और विकासात्मक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने हिमाचल की वित्तीय चुनौतियों को स्वीकार करते हुए जायज वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने विशेष केंद्रीय सहायता के तहत हिमाचल को अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने के प्रस्ताव पर भी विचार करने का आश्वासन दिया।

 

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प्राकृतिक खेती का मॉडल भी बताया

मुख्यमंत्री ने केंद्र को राज्य सरकार की ओर से सीमित संसाधनों के बावजूद वित्तीय स्थिति सुधारने के प्रयासों की जानकारी दी। CM ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में बात की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

 

इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना, गांव में परिवारों की आय बढ़ाना और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, प्रधान आवासीय आयुक्त अजय कुमार तथा केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। 


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