हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई स्कूल अब एक जैसे रंग और ड्रेस में नजर आएंगे। प्रदेश सरकार ने इन स्कूलों के विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म, शिक्षकों के ड्रेस कोड और स्कूल की इमारतों के रंग तय कर दिए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई शिक्षा विभाग की बैठक में इन फैसलों को अंतिम रूप दिया गया। सरकार ने सीबीएसई स्कूलों में जरूरी ढांचे और दूसरी सुविधाओं को बेहतर करने के लिए 80 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अलावा 5 करोड़ रुपये और जारी किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इन स्कूलों में बच्चों को घर के पास बेहतर पढ़ाई और जरूरी सुविधाएं देने के साथ उनकी एक अलग पहचान बनाने पर भी काम किया जा रहा है।
सरकार के फैसले के मुताबिक, सीबीएसई स्कूलों में बच्चों की यूनिफॉर्म हरे रंग की थीम पर होगी। इसका मकसद प्रदेश के सभी सीबीएसई स्कूलों में एक जैसा ड्रेस रखने के साथ उनकी अलग पहचान बनाना है। सरकार इन स्कूलों के लिए एक अलग लोगो तय करने पर भी काम कर रही है ताकि इनकी पहचान और साफ हो सके।
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टीचर्स की ड्रेस भी बदलेगी
सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों के लिए भी अलग ड्रेस तय की गई है। महिला शिक्षिकाएं हल्के लाइलैक यानी हल्के बैंगनी रंग की ड्रेस पहनेंगी। वहीं पुरुष शिक्षक हल्के नीले रंग की पैंट और शर्ट पहनेंगे। शिक्षकों की ड्रेस साफ-सुथरी और सादे तरीके की रखने को कहा गया है। ड्यूटी के दौरान सभी शिक्षकों के लिए पहचान पत्र पहनना जरूरी होगा। ड्रेस के साथ कम से कम दूसरी चीजें पहनने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षकों के लिए यह ड्रेस कोड 1 अक्टूबर से लागू करने की बात भी सामने आई है। इसके लिए हर शिक्षक को ड्रेस खरीदने के लिए एक बार 5 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का फैसला किया गया है। सरकार ने सीबीएसई स्कूलों की इमारतों के रंग भी तय कर दिए हैं। अब इन स्कूलों की इमारतों को ऑलिव ग्रीन और सैंड बेज रंग में रंगा जाएगा। इससे प्रदेश के सीबीएसई स्कूल दूर से ही एक जैसे नजर आएंगे और उनकी अलग पहचान बनेगी। सरकार पहले से ही इन स्कूलों के लिए एक अलग रंग और लोगो तय करने की दिशा में काम कर रही थी।
दिन में तीन बार होगी हाजिरी
सीबीएसई से जुड़े सरकारी स्कूलों में बच्चों की हाजिरी को लेकर भी बदलाव किया जा रहा है। इन स्कूलों में दिन में तीन बार हाजिरी दर्ज करने की व्यवस्था लागू की जाएगी। पहली हाजिरी सुबह स्कूल आने के समय, दूसरी लंच के समय और तीसरी स्कूल से छुट्टी के समय दर्ज होगी। सरकार का कहना है कि इससे बच्चों की उपस्थिति और स्कूल में पढ़ाई की व्यवस्था पर नजर रखने में मदद मिलेगी। यह व्यवस्था प्रदेश के करीब 150 सीबीएसई सरकारी स्कूलों में लागू करने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, 'सरकार का मकसद बच्चों को घर के पास अच्छी पढ़ाई की सुविधा देना है। खासकर ग्रामीण इलाकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़े इस पर सरकार जोर दे रही है।' सरकारी सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाई निजी सीबीएसई स्कूलों की तुलना में कम खर्च में देने की बात भी कही गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने सीबीएसई स्कूलों में जरूरी ढांचे और दूसरी सुविधाओं के विकास के लिए 80 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अलावा 5 करोड़ रुपये और जारी किए जाएंगे। इन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, करीब 1200 शिक्षक पहले ही इन सीबीएसई स्कूलों में नियुक्त किए जा चुके हैं और आने वाले समय में और शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। खाली होने वाले शिक्षक पदों को भी प्राथमिकता के आधार पर भरने की बात कही गई है ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
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स्कूलों को मिलेगी नई पहचान
सरकार का यह फैसला सिर्फ ड्रेस तक सीमित नहीं है। बच्चों की यूनिफॉर्म, शिक्षकों की ड्रेस और स्कूल की इमारतों के रंग एक जैसे रखने से सभी सीबीएसई स्कूलों को एक अलग पहचान देने की कोशिश की गई है। अब इन स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों की ड्रेस के साथ स्कूल की इमारत भी एक जैसी थीम में नजर आएगी। सरकार की योजना इन स्कूलों में पढ़ाई के साथ सुविधाओं और व्यवस्था को भी बेहतर करने की है। इसके लिए स्कूलों में जरूरी ढांचा मजबूत करने, शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने और स्कूलों की रोज की व्यवस्था पर नजर रखने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
बैठक में विधायक सुरेश कुमार, चंद्र शेखर और नीरज नैय्यर, हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के सदस्य विजय पाल सिंह, सचिव शिक्षा राकेश कंवर, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।