हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली के पास चलौंठी क्षेत्र में निर्माणाधीन फोरलेन टनल की वजह से स्थानीय निवासियों को दिक्कत का सामना करना पड़ा है। यहां पर अनियंत्रित ब्लास्टिंग के कारण नाजुक चट्टानों में दरारें बन गईं, जिससे कई मकानों, होटल और सड़कों में गहरी दरारें आ गईं। इसके बाद शुक्रवार रात अचानक स्थिति बिगड़ने पर प्रशासन को करीब 15 परिवारों (लगभग 40 लोगों) को आधी रात में अपने घर खाली करना पड़ा।
घटना भट्ठाकुफर से संजौली तक बन रही चार-लेन टनल से जुड़ा है, जिसका काम NHAI की ओर से एक निजी कंपनी कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात में हो रही भारी ब्लास्टिंग से पूरा इलाका हिल रहा है। तीन दिन पहले ही दीवारों में हल्की दरारें दिखाई देने लगी थीं, लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने इसे सामान्य बात बताई। शुक्रवार शाम दरारों की संख्या बढ़ने लगी, तो देर रात एक होटल और दो बहुमंजिला मकानों को खाली करवाना पड़ा। होटल में ठहरे पर्यटक भी सड़क पर आ गए।
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रातभर ठंड में सड़क पर बैठे रहे लोग
तापमान 1 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने पर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सड़क किनारे आग जलाकर बैठे नजर आए। शुरुआत में उनके लिए ठहरने की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई, जिससे लोगों में गुस्सा और डर बढ़ गया। बाद में SDM शिमला (ग्रामीण) ने दावा किया कि रात 1 बजे तक वे खुद मौके पर रहे और अधिकांश परिवारों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया। कुछ को किसान भवन और होटलों में शिफ्ट किया गया।
मंत्री ने लिया मौके का जायजा
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह शनिवार सुबह खुद चलौंठी पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से बात की और NHAI तथा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से लंबे समय से इस मुद्दे को उठाने का जिक्र किया। मंत्री ने तुरंत ब्लास्टिंग रोकने के निर्देश दिए और कहा कि नुकसानग्रस्त भवनों की पूरी भरपाई की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया है कि प्रभावितों को उचित मुआवजा मिलेगा।’
बाईपास भी क्षतिग्रस्त
दरारें सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहीं। संजौली-ढली बाईपास सड़क पर भी बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं। सुरक्षा के मद्देनजर इस सड़क पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई और पुलिस बल तैनात कर दिया गया। यह घटना पिछले सालों की आपदाओं को याद दिला रही है। दिसंबर 2025 में भट्ठाकुफर में टनल निर्माण से सड़क पर 15 फीट गहरा गड्ढा बन गया था। वहीं, जून 2025 में एक पांच मंजिला इमारत धराशायी हो गई थी। पीड़ितों का आरोप है कि अब तक उन्हें पूरा मुआवजा नहीं मिला। इलाके में पहले से ही जमीन धंसने और भूस्खलन की घटनाएं आम हैं, जिससे बिना बारिश के भी घरों में दरारें आने से दहशत का माहौल है।
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तुरंत जांच और काम बंद
स्थानीय निवासी टनल निर्माण तुरंत रोकने और तकनीकी जांच कराने की मांग कर रहे हैं। वे कहते हैं कि ‘हमने अपनी जिंदगी भर की कमाई इन घरों में लगाई है, अब कहां जाएंगे?’ संगठनों ने NHAI और ठेकेदारों पर ‘अवैज्ञानिक’ तरीके से काम करने का आरोप लगाया है।
प्रशासन ने क्षति आकलन के लिए SDM की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी है। NGT भी हाल ही में इस फोरलेन प्रोजेक्ट की पर्यावरणीय और सुरक्षा जांच कर रहा है।