हिमाचल प्रदेश में पनीर के नाम पर बेचे और इस्तेमाल किए जा रहे एनालॉग यानी नॉन-डेयरी पनीर (कृत्रिम पानी) पर सरकार ने सख्ती कर दी है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त की ओर से जारी अधिसूचना के तहत ऐसे उत्पादों को पनीर के रूप में बनाने, बेचने, सप्लाई करने और खाद्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल करने पर रोक लगाई गई है।
अधिसूचना के अनुसार एनालॉग पनीर ऐसे पनीर जैसे उत्पाद को कहा गया है, जिसमें दूध या दुग्ध सामग्री के स्थान पर पूरी या आंशिक रूप से वनस्पति तेल, वेजिटेबल फैट या अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे उत्पाद को पनीर के नाम से बाजार में पेश करना नियमों के विपरीत माना जाएगा।
यह भी पढ़ें: रेलवे का कमाल, कबाड़ में फेंकने की जगह पुराने सामान से बनाए बायो-टॉयलेट
होटल-रेस्तरां भी दायरे में
सरकार का यह आदेश केवल दुकानों तक सीमित नहीं है। होटल, रेस्तरां, ढाबे, कैटरिंग संस्थान, कैंटीन और अन्य फूड सर्विस प्रतिष्ठानों में भी पनीर के नाम पर एनालॉग उत्पाद का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। मेन्यू, बिल, डिस्प्ले या विज्ञापन में किसी उत्पाद को पनीर बताया गया है तो उसमें निर्धारित मानकों वाला वास्तविक पनीर ही होना चाहिए।
खरीद का रिकॉर्ड रखना होगा
खाद्य कारोबारियों को पनीर की खरीद से संबंधित बिल, इनवॉयस, सप्लायर का विवरण, बैच और अन्य ट्रेसबिलिटी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने होंगे। खाद्य सुरक्षा अधिकारी जरूरत के अनुसार प्रतिष्ठानों से नमूने लेकर उनकी जांच भी कर सकते हैं।
मानकों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई
अधिसूचना में खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी, निरीक्षण और सैंपलिंग के दौरान पनीर एवं पनीर जैसे उत्पादों में मानकों से संबंधित कमियां सामने आने का उल्लेख किया गया है। ऐसे मामलों को देखते हुए एनालॉग पनीर पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित उत्पाद को जब्त, डिटेन, रिकॉल या नष्ट करने के साथ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
यह भी पढ़ें: भुवनेश्वर में कैब-ऑटो ड्राइवरों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा, 113 लोग गिरफ्तार
एक साल तक प्रभावी रहेगा आदेश
अधिसूचना के अनुसार यह आदेश राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा, जब तक इसे वापस, संशोधित या कानून के अनुसार अन्यथा नहीं किया जाता। सरकार के इस फैसले से अब प्रदेश में पनीर बेचने और इस्तेमाल करने वाले खाद्य कारोबारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है और उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उपभोक्ताओं को पनीर के नाम पर गैर-दुग्ध उत्पाद न परोसा जाए।