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रेलवे का कमाल, कबाड़ में फेंकने की जगह पुराने सामान से बनाए बायो-टॉयलेट

रेलवे ने अपने पुराने सामान को कबाड़ में फेंकने से पहले उनका इस्तेमाल करने का फैसला किया। इसका नतीजा यह हुआ कि ललितपुर के तीन और दतिया जिले के एक स्टेशन पर बॉयो-टॉयलेट का निर्माण हो सका।

Indian Railways

प्रतीकात्मक फोटो। (AI-generated image)

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स्टेशनों पर यात्रियों को साफ-सुथरी और बेहतर सुविधा देने की दिशा में रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। झांसी स्थित कोच मिडलाइफ रिहैबिलिटेशन (CMLR) वर्कशॉप ने एक नई इन-हाउस पहल की शुरुआत की। इसके तहत वर्कशॉप के तकनीकी स्टाफ ने ललितपुर जिले के माताटीला, जीरोन, जखोरा और मध्य प्रदेश के दतिया जिले के बसई स्टेशन पर मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट का निर्माण किया है। यह सभी स्टेशन NSG-6 कैटेगरी के है।

 

इन मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट के निर्माण में कोच की पीरियडिक ओवरहॉलिंग (POH) के दौरान निकले काम के और दोबारा इस्तेमाल होने लायक पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया। इन पार्ट्स में फाइबर-रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक (FRP) टॉयलेट मॉड्यूल, बायो-टैंक, पानी की टंकियां और कोच के दोबारा इस्तेमाल होने वाले सामान का उपयोग किया गया।

 

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कबाड़ में फेंकने की जगह किया सर्वोत्तम उपयोग

रेलवे की यह पहल इसलिए भी अहम है कि इन पार्ट्स को कबाड़ समझने से पहले इनकी जांच की गई। दोबारा इस्तेमाल करने से पहले उनकी जांच की गई। साफ किया गया, मरम्मत की गई और जरूरत पड़ने पर सुधार भी किया गया। यह पहले रेलवे संसाधनों के सर्वोत्तम इस्तेमाल की झलक भी देती है और 'वेस्ट टू वेल्थ' की आवधारणा को बढ़ा रही है।

सीएमएलआर के स्टाफ ने क्या-क्या किया?

मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट बनाने और लगाने की पूरी प्रक्रिया सीएमएलआर वर्कशॉप के अपने स्टाफ ने की। इन कामों में एफआरपी टॉयलेट मॉड्यूल, बायो-टैंक और पानी की टंकियों की जांच, जरूरी मरम्मत और सुधार, सपोर्ट स्ट्रक्चर बनाना, मॉड्यूलर टॉयलेट यूनिट को जोड़ना, पानी, सैनिटरी, प्लंबिंग और ड्रेनेज कनेक्शन बनाना शामिल है।

 

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रेलवे का कहना है कि इस पहल से नए सामान पर निर्भरता कम हुई है और साथ ही उपलब्ध संसाधनों और वर्कशॉप की तकनीकी क्षमताओं का प्रभावी इस्तेमाल हुआ है। वहीं कम लागत में यात्रियों के लिए उपयोगी सुविधाएं बनाना मुमकिन हो पाया है। बता दें कि एनएसजी-6 श्रेणी के माताटीला, बसई, जखोरा और जीरोन स्टेशन ग्रामीण क्षेत्र में पड़ते हैं। यहां बायो-टॉयलेट के निर्माण से यात्री सुविधाओं में इजाफा हुआ है। 


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