केरल में 10 साल बाद यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) की सत्ता में वापसी हो रही है। इस गठबंधन की अगुवाई कर रही कांग्रेस ने वी डी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है। पेंशन बढ़ाने, महिलाओं के लिए बस यात्रा फ्री करने और 25 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस देने जैसे वादे करके सत्ता में आई कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती है कि अब वह इन वादों को पूरा करे। वादा पूरा करने में सबसे बड़ी चुनौती है कि इनके लिए भारी भरकम रकम की जरूरत है। केरल की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और बीते 10 साल में उसका कर्ज लगभग ढाई गुना बढ़ गया है।
केरल के बजट को देखें तो पता चलता है कि वह एक मोटी रकम सिर्फ कर्ज चुकाने में खर्च कर रहा है। राज्य के आंकड़े बताते हैं कि साल 2024-25 में केरल ने 73,167 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने में खर्च किए। इसी तरह 2025-26 में 1,17,129 करोड़ कर्ज चुकाने में खर्च हुए है। 2026-27 के लिए कर्ज चुकाने में 1,42,683 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह दिखाता है कि केरल कर्ज के जाल में फंसा हुआ है।
कितना बड़ा है केरल का बजट?
साल 2026-27 के बजट में केरल सरकार ने बताया कि 2025-26 में उसकी कुल कमाई 1,92,455 करोड़ रुपये थी। इसमें से राजस्व से 1.37 लाख करोड़ और पूंजीगत कमाई 55372 करोड़ थी। इसमें 53949 करोड़ रुपये का कर्ज भी था। यानी केरल ने एक साल में 53949 करोड़ का कर्ज है। वहीं, 2026-27 में कुल 55,419 करोड़ रुपये का कर्ज लिए जाने का अनुमान है।
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साल 2025-26 में राज्य की कुल कमाई में से केरल ने 31816 करोड़ रुपये सिर्फ ब्याज चुकाने में खर्च कर दिए। साल 2025-26 में केरल का राजस्व घाटा 36889 करोड़ था जो पिछले साल यानी 2024-25 में 27124 करोड़ रुपये ही था। यानी एक साल में राजस्व घाटे में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस साल यानी 2026-27 में इसके 34586 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। केरल का ग्रॉस स्टेट डोमेस्टक प्रोडक्ट (GSDP) साल 2026-26 में 14.27 लाख करोड़ का था। उसका राजस्व घाटा GSDP का 2.59 प्रतिशत और राजकोषीय घाटा 3.78 प्रतिशत था।
कहां खर्च होते हैं केरल के पैसे?
केरल का बजट बताता है कि केरल में साल 2025-26 में शिक्षा पर 23939 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य पर 10694 करोड़ रुपये, खेती पर 6367 करोड़ रुपये और सामाजिक विकास की योजनाओं पर 20776 करोड़ रुपये खर्च हुए है। केरल में पेंशन और अन्य भत्तों पर 29414 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके अलावा, एक बड़ी रकम कर्ज और ब्याज चुकाने और कर्मचारियों को वेतन देने पर खर्च होती है।
कितने भारी पड़ेंगे कांग्रेस के वादे?
कांग्रेस ने महिलाओं के लिए बस यात्रा फ्री करने का एलान किया है। अनुमान है कि इस योजना पर कम से कम 2 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। केरल सरकार ने 2026-27 में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के लिए 14,500 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। अभी तक केरल में 1000 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक दिए जाते हैं। कांग्रेस ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर 3000 रुपये दिए जाने का एलान किया है। ऐसे में यह बजट बढ़कर 20 हजार करोड़ से भी ज्यादा हो सकता है।
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साथ ही, केरल में गरीब परिवारों को हर महीने 6 हजार रुपये देने का वादा किया गया है। इस योजना पर कम से कम 7 हजार करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। इसी तरह लड़कियों को 1000 रुपये महीने देने, 25 लाख का इंश्योरेंस मुफ्त देने और 5 लाख तक का ब्याज मुक्त लोने देने पर भी भारी भरकम खर्च होने की उम्मीद है।
क्या हैं कांग्रेस के वादे?
केरल के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कई लोकलुभावन वादे किए थे। ये ऐसे वादे हैं जिनका बोझ राज्य की इकॉनमी पर पड़ना तय है। इसी तरह के वादों के कांग्रेस को हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में कामयाबी मिल चुकी थी इसलिए कांग्रेस ने इसे बढ़-चढ़कर प्रचारित भी किया। चुनाव के नतीजे बताते हैं कि कांग्रेस को इसका फायदा मिला और लोगों ने इन वादों पर यकीन करके वोट भी दिए।
कांग्रेस ने केरल में महिलाओं के लिए बस यात्रा फ्री करने, कॉलेज जाने वाली छात्राओं को हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता देने, सामाजिक कल्याण पेंशन बढ़ाकर 3000 हजार रुपये करने और ओमान चांडी के नाम पर हर परिवार को 25 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस, 5 लाख तक का ब्याज मुक्त लोन देने का एलान किया है। ये ऐसे वादे हैं जिन पर सीधे तौर पर पैसे खर्च होते हैं।
इसके अलावा, गरीब महिलाओं को हर महीने 6 हजार रुपये देने और बुजुर्गों के सम्मान, उनकी देखभाव और उनके कल्याण के लिए एक डेडिकेटेड मंत्रालय बनाने का भी एलान किया है।