उत्तर प्रदेश का वाराणसी इन दिनों अलग-अलग वजहों से चर्चा में है। मूर्तियों तोड़े जाने के आरोपों से भरे कई वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं और अब फर्जी खबरें फैलाने वालों पर कार्रवाई भी होने लगे हैं। ऐसे ही कुछ वीडियो में दावा किया गया कि मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं और होटल बनाए जा रहे हैं। होटल का जिक्र आता है तो एक अस्पताल का नाम भी आता है। वजह है कि यह नया होटल 'अवंतिका' जहां खुला है, वहां पहले एक बहुचर्चित अस्पताल हुआ करता था। अस्पताल भी ऐसा कि सिर्फ यूपी ही नहीं बिहार के भी कई जिलों के लोग यहां इलाज कराने आने लगे थे। अब वे तस्वीरें भी वायरल हैं जिनमें जर्जर अस्पताल और चमचमाते होटल की तुलना की जा रही है।
इसकी वजह यह है कि 2009-10 में बंद हो चुके इस अस्पताल में 2017 में ओपीडी सेवाएं शुरू की गई थीं और वादा किया गया था कि सरकार से कहकर इसे बड़े अस्पताल में बदलवाने के प्रयास किए जाएंगे। अब उसी जगह पर एक आलीशान होटल खड़ा होने के चलते मामला चर्चा में आ गया है। आइए इस पूरे मामले को समझते हैं।
2017 में क्या हुआ था?
साल 2017 के नवंबर महीने में छपी कई खबरों में इस बात का जिक्र है कि गंगा नदी के किनारे रामघाट पर स्थित मेहता अस्पताल नशेड़ियों और जुआरियों का अड्डा बन गया है। यहां तक कि जब इन नशेड़ियों को रोका-टोका जाता तो ये डॉक्टरों और मरीजों तक से भिड़ जाते थे। इसी साल अप्रैल के महीने में इस अस्पताल में ओपीडी सेवाएं शुरू की गई थीं। इस अस्पताल में एक समय पर 80 बेड की सुविधा थी, जिसमें 40 बेड महिला वॉर्ड के और 40 बेड अन्य मरीजों के लिए उपलब्ध थे। अप्रैल में जब ओपीडी की शुरुआत हुई थी तब यह भी कहा गया था कि इसे मल्टी स्पेशियलिटी सेंटर बनाया जाएगा।
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किसने खोला होटल?
वाराणसी अब जो होटल 'Avantika by the Ganges' खोला गया है, इसे इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) ने खोला है। मोटा-माटी समझें तो इसका असली मालिक ताज होटल ग्रुप है, जिसे टाटा ग्रुप चलाता है। हालांकि, इसे चलाने का जिम्मा श्रीवरी केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के पास है जिसके मालिक हैं के शिव प्रसाद। यानी प्रॉपर्टी तो के शिव प्रसाद और उनकी कंपनी की है लेकिन उसमें होटल ताज ग्रुप का IHCL चलाएगा।
क्या है मेहता अस्पताल की कहानी?
एक वक्त ऐसा था जब यहां उत्तर प्रदेश का पहला नियोनैटल इंटेसिव केयर यूनिट (NICU) खोली गई थी। साथ ही, स्पाइनल केयर यूनिट भी स्थापित की गई थी। बाद के दिनों में यहां सुविधाएं बदहाल होती गईं। समय के साथ बिजली तक की कमी होने लगी, लिफ्ट खराब होने लगी। 2009-2010 में इसे बंद कर दिया गया था।
साल 1954 में इस अस्पताल की नींव उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल मुरारी लाल मेहता के हाथों रखी गई थी। इसकी स्थापना मुरारी लाल मेहता ने करवाई थी। 14 साल में यह बनकर तैयार हुआ और सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इसका उद्घाटन किया। इससे पहले, साल 1946 से ही मातृ सेवा सदन के रूप में यह अस्पताल मैटरनिटी वॉर्ड के रूप में चल रहा था। उस जमाने में शुरू हुए इस अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई गई थीं।
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1992-93 में यहां UP की पहली NICU स्थापित हुई और 1997 में पहले स्पाइनल केयर यूनिट आने से यूपी के साथ-साथ बिहार से भी मरीज यहां आने लगे। 1999 से 2003 के बीच तो यह अस्पताल खूब चर्चा में रहा और सैकड़ों मरीज हर दिन आने लगे। BHU से यहां कई मरीजों को रेफर भी किया जाता था।
साल 2003 में यहां की स्पाइनल केयर यूनिट बंद हुई और अस्पताल के बुरे दिन शुरू हो गए। पैसों की कमी से बचने के लिए उस वक्त के ट्र्स्टी शंकर लाल मेहता ने अपने पैतृक घर संगवेद विद्यालय को एक रिसर्च सेंटर में बदलने का फैसला किया। हालांकि, लोग इसके खिलाफ उतर आए क्योंकि इस घर में 30 हजार से ज्यादा पांडुलिपियां रखी गईं। दिसंबर 2009 में इस अस्पताल की ज्यादातर सुविधाएं बंद हो गईं सिर्फ ओपीडी सेवाएं नाम मात्र के लिए जारी रहीं।
अब यहां से अस्पताल का नाम और निशान पूरी तरह से मिट चुका है और एक आलीशान होटल तैयार है। इसी होटल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।