भारत में चुनावी राजनीति अब चौंकाने वाले मोड़ ले रही है। ऐसा कहना इसलिए भी सही है क्योंकि महाराष्ट्र के ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद में एक अप्रत्याशित गठबंधन देखने को मिला है। मुंबई से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित इस नगर परिषद में कांग्रेस और बीजेपी ने एक-दूसरे से हाथ मिला लिया है। दोनों दलों ने शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने के लिए यह समझौता किया है। इस गठबंधन को लेकर राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है।
हैरानी की बात यह भी है कि इसमें अजीत पवार की NCP भी शामिल है, जिसके चलते अब शिवसेना को विपक्ष में बैठना पड़ेगा। इस गठबंधन का सीधा फायदा बीजेपी को मिला है। पार्टी की उम्मीदवार तेजश्री करंजुले ने बहुमत हासिल कर महापौर का पद जीत लिया।
यह भी पढ़ें- 'उन्हें मानसिक इलाज की जरूरत है', ममता बनर्जी को लेकर सुवेंदु ने ऐसा क्यों कहा?
'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' VS 'अभद्र युति'
अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 32 पार्षदों के समर्थन से बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला है। इनमें बीजेपी के 14, कांग्रेस के 12 और अजीत पवार गुट की NCP के 4 पार्षद शामिल हैं। इस गठबंधन को 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' नाम दिया गया है। इसके बाद शिंदे गुट में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। शिवसेना ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए इस गठबंधन को 'अभद्र युति' करार दिया है।
गठबंधन का नुकसान
जहां एक ओर कांग्रेस और बीजेपी को इस गठबंधन से फायदा हुआ है, वहीं दूसरी ओर महायुति और महागठबंधन के भीतर तनाव बढ़ गया है। माना जा रहा है कि अब बीजेपी और शिंदे गुट के बीच सियासी टकराव और तेज होगा। शिंदे गुट के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस-मुक्त भारत की बात करने वाली बीजेपी ने अंबरनाथ में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया है। उन्होंने इसे शिवसेना की पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया।
यह भी पढ़ें- ASI संदीप लाठर सुसाइड केस: परिवार को मिली 1 करोड़ की मदद और एक सरकारी नौकरी
बीजेपी ने किया पलटवार
बीजेपी उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने शिंदे गुट के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों से भ्रष्टाचार में लिप्त शिंदे गुट के साथ सत्ता में रहना ही असल में अनुचित गठबंधन होता। उन्होंने यह भी बताया कि अंबरनाथ नगर परिषद में गठबंधन को लेकर शिंदे गुट से कई बार बातचीत की कोशिश की गई लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।