हिमाचल प्रदेश में आईपीएस अधिकारी संजीव गांधी की पोस्टिंग एक बार फिर बदल गई है। पूर्व एसएसपी शिमला और डीआईजी रैंक के अधिकारी गांधी को अब हिमाचल प्रदेश जनरल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन लिमिटेड, शिमला का प्रबंध निदेशक (एमडी) नियुक्त किया गया है। करीब 6 महीने के भीतर पांचवीं बार उनकी तैनाती बदली गई है। लगातार बदलती जिम्मेदारियों के बीच उनकी नई नियुक्ति ने प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है।
कार्मिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 24 अक्तूबर को किए गए आदेश के तहत संजीव कुमार गांधी (आईपीएस, हिमाचल कैडर 2012 बैच) को हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, कांगड़ा के प्रबंध निदेशक पद पर तैनाती के आदेश से हटाकर जनरल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन का एमडी लगाया गया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से की गई है। वह भूपेंद्र कुमार (एचपीएएस, 2009 बैच) की जगह लेंगे, जिन्हें इस पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था।
एसएसपी शिमला से निगमों के प्रबंधन तक का सफर
संजीव गांधी का प्रशासनिक सफर पिछले कुछ महीनों में लगातार बदलती पोस्टिंग के कारण चर्चा में रहा है। शिमला के एसएसपी पद पर सेवाएं देने के बाद उन्हें फरवरी 2026 में इस जिम्मेदारी से हटाया गया। इसके बाद उनकी तैनाती को लेकर कई बार आदेश जारी हुए। उनकी पोस्टिंग में आए प्रमुख बदलाव इस प्रकार रहे-
- फरवरी 2026: एसएसपी शिमला के पद से हटाकर कार्मिक विभाग में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए
- 9 फरवरी: हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया
- 24 फरवरी: मिल्कफेड की पोस्टिंग के बाद उन्हें दोबारा कार्मिक विभाग में रिपोर्ट करने को कहा गया
- मार्च 2026: डीआईजी ट्रैफिक, टूरिस्ट एंड रेलवे (टीटीआर) के पद पर तैनाती हुई। उन्होंने 24 मार्च को कार्यभार संभाला
- अक्तूबर 2026: हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, कांगड़ा का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया
- अक्तूबर 2026: अब उन्हें जनरल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन, शिमला का एमडी लगाया गया है
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तबादलों के बीच दो एफआईआर से भी चर्चा में अधिकारी
संजीव गांधी की नई पोस्टिंग ऐसे समय में हुई है, जब उनके खिलाफ सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित दो एफआईआर दर्ज होने के मामले भी सुर्खियों में हैं। पहला मामला पुलिस के एक कांस्टेबल की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आधिकारिक कार्यों और व्यवस्थाओं पर खर्च किए गए करीब 1.87 लाख रुपये का उसे भुगतान नहीं किया गया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में जिला पुलिस फंड से लगभग 2.35 लाख रुपये की कथित अनियमित निकासी का भी उल्लेख किया गया। इस मामले में धोखाधड़ी, वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से संबंधित आरोप लगाए गए हैं।
दूसरा मामला पुलिस भवनों और जवानों के सरकारी आवासों की मरम्मत के लिए निर्धारित बजट के कथित इस्तेमाल से जुड़ा है। पुलिस मुख्यालय की ऑडिट समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान मरम्मत के लिए आवंटित करीब 1.28 करोड़ रुपये में से 14,07,392 रुपये तत्कालीन एसएसपी के सरकारी आवास साउथवुड पर खर्च किए जाने का उल्लेख मिला। रिपोर्ट में आवश्यक स्वीकृतियों और दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालाँकि ये आरोप और ऑडिट में सामने आई आपत्तियां हैं, जिन्हें न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
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अधिकारी ने आरोपों को बताया गलत
संजीव गांधी पहले ही अपने खिलाफ दर्ज मामलों को गलत बताते हुए कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने आरोपों को दबाव बनाने की कोशिश करार दिया है और कहा है कि वह कानूनी तरीके से जवाब देंगे। उन्होंने रोड सेफ्टी फंड के इस्तेमाल की स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी उठाई थी। गांधी का कहना रहा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई फंड के उपयोग को लेकर सवाल उठाने से जुड़ी है। वहीं पुलिस की ओर से दर्ज मामलों में शिकायतों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जा रही है। ऐसे में इन प्रकरणों में सामने आने वाले साक्ष्य और जांच के निष्कर्ष आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
नई पोस्टिंग से क्या संकेत?
संजीव गांधी की लगातार बदलती पोस्टिंग का घटनाक्रम हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक तबादलों और अधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर कई सवाल खड़े करता है। हालांकि, केवल तबादलों की संख्या के आधार पर किसी प्रशासनिक फैसले के पीछे की मंशा तय नहीं की जा सकती। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि पूर्व शिमला एसएसपी अब एक औद्योगिक निगम के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। दूसरी तरफ उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच भी एक अलग प्रक्रिया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नई नियुक्ति में उनकी भूमिका किस तरह आगे बढ़ती है और लंबित विवादों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।