संजय सिंह, पटना: बिहार की राजनीति पल-पल बदल रही है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने नालंदा से 8 बार के विधायक श्रवण कुमार को विधायक दल का नया नेता चुन लिया है। पार्टी की ओर से उनके नाम का प्रस्ताव पहले ही विधानसभा को भेजा जा चुका था, जिस पर अब औपचारिक मुहर लग गई है।
विधानसभा सचिवालय ने भी इसे लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। इससे साफ हो गया है कि JDU ने अनुभव और संगठनात्मक मजबूती को प्राथमिकता दी है। पार्टी ने अब श्रवण कुमार पर बड़ा दांव खेला है।
मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद जेडीयू विधायक दल के नेता का पद खाली हो गया था। इसको लेकर पार्टी के भीतर लगातार मंथन चल रहा था। हाल ही में हुई JDU विधायकों की बैठक में सर्वसम्मति से श्रवण कुमार को नेता चुन लिया गया।
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क्यों अशोक चौधरी और लेसी सिंह से आगे निकले श्रवण कुमार?
अशोक चौधरी और लेसी सिंह भी नीतीश कुमार के करीबी बताए जाते हैं। इसके बाद भी जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व ने भी इस निर्णय पर अपनी सहमति दे दी, जिससे उनके चयन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। श्रवण कुमार के चयन को लेकर राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पार्टी ने एक ऐसे चेहरे को आगे बढ़ाया है, जिनका अनुभव लंबा है और जो संगठन के भीतर स्वीकार्य भी हैं। श्रवण कुमार की छवि एक शांत, संतुलित और कार्यकर्ता-आधारित नेता की रही है, जो जमीनी स्तर पर पकड़ रखते हैं। इधर, श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता बनाए जाने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
निशांत के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा
नीतीश कुमार के पुत्र निशांत भी JDU कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और आगे की रणनीति पर चर्चा की। इस मौके पर निशांत ने श्रवण कुमार को बधाई देते हुए कहा कि यह एक अच्छा फैसला है और इससे पार्टी को मजबूती मिलेगी।
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कैसा रहा है श्रवण कुमार का राजनीतिक सफर?
श्रवण कुमार का राजनीतिक सफर बेहद मजबूत और निरंतर जीत से भरा रहा है। उन्होंने पहली बार 1995 में विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार जनता का विश्वास जीतते रहे। वह साल 1995, 2000, 2005 (फरवरी), 2005 (अक्टूबर), 2010, 2015, 2020 और 2025 में विधायक चुने जा चुके हैं। इस तरह वे अब तक कुल 8 बार विधायक बन चुके हैं। उनकी क्षेत्र में मजबूत पकड़ है और वह लोकप्रिय नेता हैं।
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सरकार में रही है अहम भूमिका
सरकार में भी उनकी भूमिका काफी अहम रही है। वह लंबे समय तक ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहां उन्होंने कई योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर उन्होंने सरकार और विधानसभा के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
श्रवण कुमार बिहार विधानसभा में मुख्य सचेतक के पद पर भी रह चुके हैं, जिससे उनकी प्रशासनिक और विधायी समझ का अंदाजा लगाया जा सकता है। हाल ही में बिहार सरकार ने उनकी सुरक्षा बढ़ाते हुए उन्हें वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा भी दी है। अब उनका सियासी कद बढ़ता जा रहा है।