मध्य प्रदेश के जबलपुर में अधारताल इलाके के लिटिल किंगडम स्कूल में गोवा ट्रिप को लेकर शुरू हुआ झगड़ा अब बहुत बढ़ गया है। आरोप है कि जो बच्चे स्कूल की गोवा ट्रिप में नहीं गए, स्कूल ने जानबूझकर उनके 10वीं क्लास के इंटरनल नंबर कम कर दिए। इस बात से गुस्साए छात्र और उनके माता-पिता स्कूल पहुंच गए और वहां जमकर हंगामा किया। पेरेंट्स का कहना है कि ट्रिप का खर्चा बहुत ज्यादा था जिसे हर कोई नहीं दे सकता था लेकिन स्कूल ने इसका बदला बच्चों के रिजल्ट से लिया। वहां हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को बुलाना पड़ा, तब जाकर मामला शांत हुआ। अब परिवार वाले मांग कर रहे हैं कि इस मामले की सही जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा कर्णिका सिंह ने बताया कि वह गोवा ट्रिप पर नहीं गई थी क्योंकि उसने स्कूल की दूसरी एक्टिविटी में हिस्सा लिया था लेकिन फिर भी उसके नंबर काट लिए गए। छात्रा का कहना है कि गोवा जाने से पहले स्कूल एक फॉर्म भरवाता है जिसमें लिखा होता है कि अगर बच्चे को कुछ भी होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी पेरेंट्स की होगी। उसने यह भी बताया कि बच्चों ने पूरे साल रात-रात भर जागकर पढ़ाई की और अपनी प्रैक्टिकल फाइल भी जमा की लेकिन फिर भी स्कूल ने उनके 10 से 25 नंबर तक कम कर दिए। वहीं, स्कूल के कुछ पसंदीदा बच्चों को पूरे नंबर दिए गए हैं। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल के लोग पेरेंट्स को 'चीप' कहकर बुलाते हैं।
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स्कूल ने दी थी धमकी
अभिभावक श्रद्धा गुप्ता ने बताया कि स्कूल ने पहले ही डराया था कि जो बच्चा गोवा ट्रिप पर नहीं जाएगा, उसके इंटरनल नंबर काट लिए जाएंगे। जब इसकी शिकायत की गई तो स्कूल ने कहा कि यह सिर्फ एक 'मजाक' था लेकिन जब रिजल्ट आया तो सच में बच्चों के नंबर कम थे। उनके बच्चे ने लिखित परीक्षा में 78 प्रतिशत नंबर लाए थे लेकिन स्कूल की तरफ से मिलने वाले नंबरों में उसे हर विषय में बहुत कम अंक दिए गए। श्रद्धा गुप्ता के मुताबिक, स्कूल की रावल मैम ने पहले सबको पूरे नंबर देने का वादा किया था लेकिन बाद में उन्होंने फोन उठाना बंद कर दिया। वहीं गायकवाड़ मैम से मिलने पर उन्होंने इस बात को हंसी-मजाक में उड़ा दिया।
बच्चों के रिजल्ट में गड़बड़ी
पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन गुप्ता ने इस मामले में बड़े सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जिन बच्चों के लिखित परीक्षा में 80 से 96 प्रतिशत तक नंबर आए हैं, उन्हें स्कूल ने 20 में से सिर्फ 8 या 10 नंबर ही दिए हैं। इस वजह से बच्चों का कुल रिजल्ट 5% से 7% तक गिर गया है। सचिन गुप्ता का दावा है कि करीब 150 बच्चों के साथ ऐसा गलत बर्ताव किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो माता-पिता स्कूल के खिलाफ आवाज उठाते हैं, स्कूल मैनेजमेंट उनके बच्चों को जानबूझकर परेशान करना शुरू कर देता है।
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प्रशासन करेगा सख्त जांच
मामले को बढ़ता देख अब पेरेंट्स स्कूल के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और पूरी घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। अगर जांच में स्कूल की गलती पाई जाती है, तो स्कूल मैनेजमेंट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आपको बता दें कि इस स्कूल पर पिछले साल भी कलेक्टर द्वारा एक्शन लिया जा चुका है।