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महिला के कपड़े उठाना दुष्कर्म का प्रयास नहीं- झारखंड हाई कोर्ट

झारखंड हाई कोर्ट ने एक फैसले में महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और दुष्कर्म की कोशिश के बीच अंतर को स्पष्ट किया है। अदालत ने कहा कि रात में महिला के घर में घुसना या कपड़े उठाना दुष्कर्म का प्रयास नहीं है। यह आपराधिक मामला हो सकता है।

Jharkhand High Court

प्रतीकात्मक फोटो। (Photo Credit: Social Media)

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दुष्कर्म की कोशिश के आरोप में एक शख्स को सत्र न्यायालय से मिली 4 साल की सजा को झारखंड हाई कोर्ट ने घटाकर आठ महीने की कर दी। पूर्वी सिंहभूम जिले की सत्र न्यायालय ने 25 जुलाई को अपना फैसला सुनाया था। सोमवार को हाई कोर्ट ने निचली अदाल के आदेश में संशोधन किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अपने फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि रात में किसी महिला के घर में घुसना और कपड़े उठाने का प्रयास दुष्कर्म की कोशिश नहीं माना जाएगा।

 

अदालत ने महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और दुष्कर्म के प्रयास के बीच अंतर को स्पष्ट किया। कहा कि यह दुष्कर्म के प्रयास का नहीं, बल्कि अपराध का हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक 31 अगस्त को न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने एक अपील पर सुनवाई की।

 

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अदालत ने कहा कि किसी कृत्य को दुष्कर्म का प्रयास तभी मान जा सकता है, जब वह दुष्कर्म के घटित होने के करीब हो। इस मामले में सबूत किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए आपराधिक बल प्रयोग को दुष्कर्म के प्रयास में स्थापित करते नहीं दिखते हैं। हाई कोर्ट ने महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से आपराधिक बल प्रयोग के तहत शख्स की सजा को बरकरार रखा। 

 

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यह मामला झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले का है। 26 दिसंबर 1999 की रात घटना को अंजाम दिया गया था। एक दिन बाद यानी 27 दिसंबर को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके खिलाफ पुलिस ने दुष्कर्म के प्रयास के आरोप में चार्जशीट दाखिल की। 25 जुलाई को पूर्वी सिंहभूम जिले के सत्र न्यायालय ने दुष्कर्म के प्रयास के तहत शख्स को चार साल की कठोर सजा सुनाई। निचली अदालत के फैसले को उसने हाई कोर्ट में चुनौती दी। अब हाई कोर्ट ने उसकी सजा को घटाकर 8 महीने कर दी।

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