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सुरक्षा बल से सियासत तक, कैसा था नंद लाल का राजनीतिक सफर?

हिमाचल प्रदेश के रामपुर से विधायक और राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नंदलाल नहीं रहे। ITBP में कमांडो के रूप में सेवाएं देने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। 

दिवंगत विधायक नंदलाल, Photo Credit-Social Media

दिवंगत विधायक नंदलाल, Photo Credit-Social Media

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हिमाचल प्रदेश की राजनीति में रामपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले नंद लाल का सफर सुरक्षा बल में सेवाओं से शुरू होकर विधानसभा और राज्य वित्त आयोग तक पहुंचा। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में कमांडो के रूप में सेवाएं देने वाले नंद लाल ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद राजनीति में कदम रखा और देखते ही देखते रामपुर की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। मंगलवार सुबह लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू समेत हिमाचा के नेताओं ने उनके असामयिक निधन पर शुक व्यक्त किया है। 

 

नंद लाल का राजनीतिक सफर वर्ष 2007 में शुरू हुआ। इसी वर्ष वह पहली बार रामपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी जीत दर्ज कर वह लगातार चौथी बार विधानसभा पहुंचे। रामपुर से लगातार चार चुनाव जीतना उनके लंबे राजनीतिक सफर और क्षेत्र में उनकी पकड़ को दर्शाता है।

कमांडो के अनुभव से राजनीति के मैदान तक

राजनीति में आने से पहले नंद लाल ने ITBP में कमांडो के रूप में सेवाएं दी थीं। उनके सेवा जीवन का एक उल्लेखनीय पहलू पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की सुरक्षा से जुड़ा रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें राजीव गांधी के साथ SPG कमांडो सुरक्षा गार्ड के रूप में लंबे समय तक काम करने का अवसर मिला था। 

 

सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों में अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और राजनीतिक पारी की शुरुआत की। वर्ष 2007 में रामपुर से उनके टिकट को दिल्ली में पार्टी हाईकमान की मंजूरी मिलने की बात भी सामने आई थी। बताया जाता है कि उनकी उम्मीदवारी को सीधे केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी मिली थी।

 

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विधानसभा में निभाईं कई अहम जिम्मेदारियां

विधायक के रूप में नंद लाल ने केवल अपने विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व ही नहीं किया, बल्कि विधानसभा की विभिन्न समितियों में भी जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2013 से 2017 तक वह मुख्य संसदीय सचिव रहे। इसके अलावा उन्होंने विधानसभा की कल्याण समिति के सभापति के रूप में कार्य किया। वह ग्रामीण नियोजन और आचार समिति के सदस्य भी रहे। इन जिम्मेदारियों के माध्यम से उन्हें विधायी कार्यप्रणाली और विभिन्न नीतिगत विषयों पर काम करने का अवसर मिला।

 

वर्ष 2024 में प्रदेश सरकार ने नंद लाल को सातवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया। इस पद पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी प्रदान किया गया था। विधायक के रूप में लंबे अनुभव के बाद यह नियुक्ति उनके राजनीतिक सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव थी। 

 

राज्य वित्त आयोग का प्रमुख दायित्व प्रदेश की ग्राम पंचायतों और नगर निकायों की वित्तीय स्थिति का आकलन करना तथा उनके लिए संसाधनों के बंटवारे और अनुदान को लेकर सरकार को सिफारिशें देना था। स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों के वितरण और उनकी आर्थिक स्थिति से जुड़े विषय आयोग के कामकाज का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।

सुरक्षा बल से सार्वजनिक जीवन तक की पहचान

नंद लाल का सफर सुरक्षा बल में अनुशासित सेवाओं से शुरू होकर सक्रिय राजनीति और संवैधानिक संस्थागत जिम्मेदारी तक पहुंचा। ITBP में कमांडो, रामपुर से चार बार विधायक, मुख्य संसदीय सचिव और सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने सार्वजनिक जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में भूमिका निभाई।

 

उनका राजनीतिक जीवन रामपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति से गहराई से जुड़ा रहा। उनका सफर इस बात का उदाहरण भी है कि सुरक्षा बलों में सेवाएं देने के बाद किस तरह कोई व्यक्ति जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी अलग पहचान बना सकता है।


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