कर्नाटक हाई कोर्ट ने भरण पोषण मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने एक महिला की मां और बड़ी बहन को उसकी शादी तक खर्च उठाने का निर्देश दिया। शादी होने पर उसका भी खर्च उठाना होगा। आम तौर पर अदालत पति-पत्नी और बच्चों के मामले में भरण पोषण का आदेश देती हैं। मगर महिला की याचिका पर मां और बड़ी बहन को जिम्मेदार ठहराने वाला फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक धनुषश्री और उनके भाई धनुष ने पारिवारिक न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने 15 हजार रुपये मासिक भरण पोषण की मांग की। दावा किया कि उनके पिता मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण में नौकरी करते थे। उनका निधन हो चुका है।
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बड़ी बहन दर्शनी को अनुकंपा के आधार पर पिता की जगह नौकरी मिली। उस वक्त बड़ी बहन ने परिवार की जिम्मेदारी उठाने का वादा किया था। मां को पेंशन मिलती है और कमाती भी हैं। पर्याप्त आय होने के बावजूद दोनों ने भरण-पोषण करना छोड़ दिया। अपनी याचिका में धनुषश्री और धनुष ने बताया कि वह खुद का भरण पोषण करने में असमर्थ है।

पारिवारिक न्यायालय ने मां और बड़ी बहन को मासिक भरण-पोषण का निर्देश दिया। हालांकि बड़ी बहन एम. दर्शनी और मां टी मंगलगौरम्मा ने पारिवारिक न्यायालय के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती और कहा कि पारिवारिक न्यायालय का भरण-पोषण देने का आदेश मनमाना है। तर्क दिया कि भाई-बहन बालिग और अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है।
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न्यायमूर्ति डॉ. के. मनमधा राव ने एम. दर्शनी और उनकी मां टी. मंगलगौरम्मा की याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बड़ी बहन दर्शनी ने बहन और भाई की देखभाल का वादा किया था। मगर वह निभाने में विफल रही। उसकी आय भी पर्याप्त है। भाई धनुष ने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है। वह बालिग है। इस कारण वह किसी भी प्रकार के भरण-पोषण का हकदार नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा कि छोटी बहन अविवाहित है। विवाह होने तक वह मासिक भरण-पोषण और विवाह से जुड़े खर्चों की हकदार है।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि छोटी बहन धनुश्री अपनी मां से प्रति माह 20 हजार रुपये औरर शादी के खर्च के लिए 10 लाख रुपये और बड़ी बहन से हर महीने 7 हजार रुपये और 2 लाख रुपये शादी के खर्च के लिए पाने की हकदार है।