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'बच्चे को देखने के लिए पिता से नहीं ले सकते पैसे', हाई कोर्ट ने फीस खारिज कर दी

हाई कोर्ट ने पिता की अर्जी मानते हुए उसके चार साल के बेटे से मिलने की इजाजत देते हुए हर विजिट के लिए 5,000 का पेमेंट खत्म कर दिया।

Karnataka High Court

कर्नाटक हाई कोर्ट। Photo Credit- HC Website

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कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक पिता की अर्जी पर अहम सुनवाई करने हुए फैसला सुनाया। अपनी याचिका में पिता ने अपने चार साल के बेटे से अधिक समय तक मिलने का समय मांगा था। इसी के साथ हाई कोर्ट ने सुपरवाइज्ज विजिटेशन को सही ठहराते हुए हर विजिट के लिए  5,000 रुपये का पेमेंट खत्म कर दिया।

दादा-दादी को विजिट में आने से रोका

 

इसके अलावा हाई कोर्ट ने दादा-दादी को विजिट में आने से रोक दिया और चेतावनी दी कि मां का सहयोग नहीं करना आखिरी कस्टडी के फैसले में उसके खिलाफ जा सकता है।

 

फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती 

 

जस्टिस पी श्री सुधा एक पिता की अर्जी पर सुनवाई कर रही थीं, जिसमें फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी। फैमिली कोर्ट ने बच्चे से बिना सुपरवाइज़्ड विजिट करने की इजाजत नहीं दी थी और बच्चे को लाने-ले जाने और दूसरे खर्चों के लिए हर विजिट के लिए 5,000 रुपये देने का आदेश दिया था।

 

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यह मामला 24 जुलाई को आया, जब हाई कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा, 'याचिकाकर्ता पिता को हर विजिट के लिए 5,000 रुपये देने का निर्देश है। क्योंकि प्रतिवादी पत्नी ने खुद कॉफी शॉप से ​​विजिट रूम में जगह बदलने के लिए कहा है, इसलिए वह किसी भी वहन की हकदार नहीं है और इसे कैंसिल किया जाता है।'

 

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

 

कोर्ट ने कहा कि सिर्फ 1.75 किलोमीटर दूर रहने के बावजूद, मां बार-बार बिना पहले से बताए बच्चे को तय विजिट के लिए नहीं लाती थी, जिससे पिता को आने-जाने में आसानी हो। पिता के रिकॉर्ड की जांच करने पर कोर्ट ने पाया कि मां ने बार-बार विजिट ऑर्डर का पालन नहीं किया और कहा कि पेंडिंग कस्टडी पिटीशन पर फैसला करते समय उसके व्यवहार पर विचार किया जा सकता है।

 

पिता ने बच्चे से मिलने पर लगी रोक को चुनौती दी थी

 

यह मामला एक अलग रह रहे कपल के बीच अपने चार साल के बेटे की कस्टडी के झगड़े को लेकर थी। पिता ने बच्चे की परमानेंट कस्टडी के लिए बेंगलुरु के फैमिली कोर्ट में एक अर्जी दी।

 

तलाक का केस पेंडिंग रहने के दौरान पिता ने हर वीकेंड कुछ घंटों के लिए अंतरिम बिना देखरेख वाली कस्टडी मांगी थी। हालांकि फैमिली कोर्ट ने पिता को हर रविवार को देखरेख वाली मुलाकात की इजाजत दी थी, लेकिन मां अक्सर बच्चे को अपने माता-पिता के साथ देर से लाती थी और उन्हें बच्चे से खुलकर मिलने-जुलने से रोकती थी। पिता का दावा था कि इससे बच्चे की मेंटल हेल्थ पर असर पड़ रहा है।

 

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मां ने इस अनुरोध का विरोध किया, यह कहते हुए कि बच्चा पिता के साथ लंबे समय तक रहने में असहज महसूस करता है। साथ ही कहा कि बच्चा पिता से मिलने के दौरान बेचैन हो जाता है और रोता है और पिता बच्चे की परवरिश में लापरवाह रहे हैं और मेंटेनेंस नहीं दे रहे हैं। इसलिए, उन्होंने मौजूदा मुलाकात के इंतजाम में बदलाव की मांग की।

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