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'अब समय आ गया है' सबरीमाला मंदिर के प्रसाद बिक्री में भ्रष्टाचार पर केरल HC

केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह ढांचा तैयार करने का समय आ गया है।

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सबरीमाला मंदिर। Photo Credit (@JournoAshutosh)

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केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को सबरीमाला मंदिर में प्रसाद की बिक्री के संबंध गंभीर सवाल उठाते हुए सख्त टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि मंदिर में प्रसाद की बिक्री के मामले में त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (Travancore Devaswom Board) की प्रक्रिया, निगरानी, भंडार डॉक्यूमेंटेशन और वित्तीय नियंत्रण में 'गहरे तक जड़ें जमा चुकी प्रणालीगत खामियां' मौजूद हैं। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से साफ है कि बोर्ड में भ्रष्टाचार हुआ है। 

 

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड के लिए एक व्यापक, पारदर्शी और जवाबदेह ढांचा तैयार करने का समय आ गया है। साथ ही कहा कि इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि बोर्ड की वैध कमाई की सही ढंग से सुरक्षा की जाए और पैसे के गलत इस्तेमाल, चोरी या कुप्रबंधन के जरिए से इसे बर्बाद नहीं होने दिया जाए।

 

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रिपोर्ट को पढ़ने के बाद की टिप्पणी

जस्टिस राजा विजयराघवन वी. और जस्टिस के. वी. जयकुमार की पीठ ने सबरीमाला में भगवान अयप्पा के मंदिर में श्रद्धालुओं को बेचे जाने वाले पवित्र प्रसाद 'आदिया सिष्टम घी' की बिक्री के संबंध में टीडीबी कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से पैसों के दुरुपयोग की जांच कर रही वीएसीबी विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट को पढ़ने के बाद ये टिप्पणियां कीं। 

33 लोगों के खिलाफ केस दर्ज

यह एसआईटी विजिलेंस और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (VACB) के अधिकारियों को मिलाकर बनाई गई है। इसी एसआईटी ने हाईरकोर्ट को बताया कि उसने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत 33 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जिनमें मंदिर के विशेष अधिकारी और लगभग 30 अन्य कर्मी शामिल हैं।

 

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45 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश

पीठ ने इस संबंध में एसआईटी को अपनी जांच आगे बढ़ाने और 45 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी करने का निर्देश दिया। रिपोर्ट के निष्कर्षों का अध्ययन करने के बाद पीठ ने कहा, '...हमें कई अनियमितताएं मिली हैं जो गहरी जड़ें जमा चुकी प्रणालीगत कमियों की ओर इशारा करती हैं। हमारे विचार में बोर्ड को इन कमियों को तत्काल दूर करने की जरूरत है।'

 

कोर्ट ने आगे कहा, 'ये कोई छिटपुट अनियमितताएं नहीं हैं, बल्कि प्रक्रिया, पर्यवेक्षण, भंडार लेखांकन और वित्तीय नियंत्रण में प्रणालीगत कमियों की ओर इशारा करती हैं।'


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