केरल हाई कोर्ट ने एक 16 साल की छात्रा को दूसरा मौका देते हुए, उसे आज होने वाले स्टेट स्कूल कलोत्सवम में हिस्सा लेने की इजाजत दे दी है। दरअसल, उसके डिस्ट्रिक्ट-लेवल परफॉर्मेंस के दौरान एक टेक्निकल गड़बड़ी हुई थी, जिससे उसके कुचिपुड़ी मूल्यांकन पर असर पड़ने की संभावना थी।
मामला तिरुवनंतपुरम डिस्ट्रिक्ट स्कूल कलोत्सव 2025-26 का है, जहां एक 16 साल की लड़की ने कुचिपुड़ी (गर्ल्स) HSS जनरल कैटेगरी में परफॉर्म किया। स्टेज पर उसकी परफॉर्मेंस चल रही थी, तभी अचानक 32 सेकंड के लिए पावर फेलियर हो गया। बिना म्यूजिक और लाइट्स के लड़की परफॉर्म करती रही लेकिन जजों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। पावर बहाल होने के बाद उसे दूसरा मौका नहीं दिया गया, और वह पांचवें स्थान पर आ गई।
इसे लेकर लड़की ने केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि उसे दूसरे मौका दिया जाए। जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने लड़की की याचिका मंजूर कर ली और उसे 14 जनवरी से शुरू होने वाले स्टेट स्कूल कलोत्सवम में कुचिपुड़ी (लड़कियां) HSS जनरल कैटेगरी में हिस्सा लेने की इजाजत दी।
कोर्ट ने 13 जनवरी को दिए अपने आदेश में कहा, 'यह साफ है कि जब याचिकाकर्ता परफॉर्मेंस दे रही थी, तो बिजली चली गई थी। म्यूजिक नहीं बजा और लाइटें बंद हो गईं। हालांकि याचिकाकर्ता ने बिना म्यूजिक और लाइट के डांस करना जारी रखा, लेकिन उसे परफॉर्मेंस का दूसरा मौका नहीं दिया गया।'
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क्या था पूरा मामला?
यह मामला तिरुवनंतपुरम डिस्ट्रिक्ट स्कूल कलोत्सवम 2025-26 में कुचिपुड़ी (लड़कियों) इवेंट में 16 साल की एक पार्टिसिपेंट की याचिका से शुरू हुआ। याचिकाकर्ता को 5वीं स्थान मिला था।
लड़की ने अपनी याचिका में बताया कि जब वह स्टेज पर परफॉर्म कर रही थी, तो बिजली चली गई, जिससे उसकी परफॉर्मेंस पर असर पड़ा। उसने 12 जनवरी को शिक्षा विभाग के सामने आपत्ति जताई थी लेकिन विभाग ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि भले ही 32 सेकंड के लिए बिजली गई थी, लेकिन इससे उसकी परफॉर्मेंस पर कोई असर नहीं पड़ा था।
इसके बाद लड़की ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की और कहा कि इवेंट के दिन कुचिपुड़ी का परफॉर्मेंस बहुत अच्छा था और उसे A ग्रेड के साथ पहला स्थान मिलना चाहिए था।
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हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने माना कि पावर फेलियर था। भले ही लड़की ने डांस नहीं रोका, लेकिन अंधेरे में बिना म्यूजिक के परफॉर्म करना किसी भी कलाकार के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इससे कॉन्फिडेंस कम होना स्वाभाविक है।
लड़की की ओर से पेश हुए वकील राजेश कन्नन और प्रवीण एन पिल्लई ने दलील दी कि पैनल के जजों ने गलत मूल्यांकन किया और 5वें स्थान पर रखा। उन्होंने मांग की थी कि मूल्यांकन को रद्द किया जाना चाहिए, क्योंकि बिजली वापस आने के बाद उसे दूसरा मौका नहीं दिया गया। वहीं, शिक्षा विभाग का कहना था कि लड़की की परफॉर्मेंस ऐसी नहीं थी कि उसे पहले स्थान पर रखा जाए।
दोनो पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा, 'उसे दूसरा चांस नहीं दिया गया, जो अन्य प्रतियोगियों के मुकाबले उसे असमान स्थिति में ला खड़ा करता है।'
अदालत ने शिक्षा विभाग के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि लड़की को 14 जनवरी को होने वाले स्टेट कलोत्सव में कुचिपुड़ी में हिस्सा लेने मौका दिया जाना चाहिए।