logo

ट्रेंडिंग:

मणिपुर की नई सरकार पर कुकी संगठनों को ऐतराज क्या है? समझिए वजह

मणिपुर में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक तनाव गहराता नजर आ रहा है। राज्य के कई कुकी संगठनों ने अपने समुदाय के विधायकों को चेतावनी दी है।

Manipur Governor Ajay Kumar Bhalla felicitates Manipur CM Yumnam Khemchand Singh

मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला और मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह, Photo Credit: PTI

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

मणिपुर में करीब एक साल तक राष्ट्रपति शासन रहने के बाद नई सरकार बन गई है, लेकिन राज्य में शांति का रास्ता अभी भी चुनौतियों से भरा लग रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक युमनाम खेमचंद सिंह के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद, कुकी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अलग-अलग कुकी संगठनों ने अपनी कम्युनिटी के विधायकों को कड़ी चेतावनी दी है और उनसे सरकार बनाने की प्रक्रिया से दूर रहने को कहा है।

 

बुधवार, 4 फरवरी को खेमलाल सिंह ने मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री के तौर पर पद संभाला। उनके साथ कुकी समुदाय की बीजेपी विधायक नेमचा किपगेन और नागा पीपल्स फ्रंट के एल. दिखो ने भी उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। किपगेन को सरकार में शामिल करने से कुकी-बहुल इलाकों में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। बुधवार रात को कांगपोकपी जिले में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर और सड़कों पर बांस के खंभे लगाकर अपना गुस्सा जाहिर किया।

 

यह भी पढ़ें: असम का 'भू माफिया' कौन? CM हिमंत और गोगोई के झगड़े की इनसाइड स्टोरी

कुकी संगठनों ने दी चेतावनी

चुराचांदपुर जिले के एक आदिवासी संगठन, जॉइंट फोरम ऑफ सेवन (JF-7) ने शुक्रवार को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक कुकी-जो बहुल इलाकों में पूरी तरह बंद का आह्वान किया है। संगठन ने एक बार फिर कुकी समुदाय के लिए अलग प्रशासन की अपनी मांग दोहराई है।

 

इस बीच, कुकी-जो काउंसिल ने साफ तौर पर कहा है कि अगर समुदाय का कोई भी विधायक संगठन के सामूहिक फैसले के खिलाफ सरकार में शामिल होता है, तो यह उसकी निजी जिम्मेदारी होगी। काउंसिल ने साफ किया कि ऐसे एकतरफा फैसलों से होने वाले किसी भी नतीजे के लिए संगठन जिम्मेदार नहीं होगा। कुछ उग्रवादी संगठनों ने भी विधायकों को सरकार में शामिल होने के खिलाफ चेतावनी दी है।

 

यह भी पढ़ें: रोहतास के पहाड़ी गांव में मिला दुर्लभ जानवर, देखने जुट गए सैकड़ों ग्रामीण

जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा मणिपुर

गौरतलब है कि मणिपुर 3 मई 2023 से जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है। मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग के विरोध में निकाली गई रैली के बाद शुरू हुई इस हिंसा ने अब तक कम से कम 260 लोगों की जान ले ली है। हजारों लोग अब भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इसी हिंसा के चलते एन. बीरेन सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था और राज्य में लंबे समय तक राष्ट्रपति शासन लागू रहा। अब जब नई सरकार ने कमान संभाली है, तो कुकी संगठनों का यह कड़ा रुख राज्य में राजनीतिक स्थिरता और समुदायों के बीच सुलह की कोशिशों के लिए एक नई चुनौती पेश कर रहा है।


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap