उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित हैक्सार स्टूडियो में हुए भीषण अग्निकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे लापरवाही की नई परतें खुल रही हैं। शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि बिल्डिंग की छत पर बिजली के तारों का जाल बिछा था, जिसे छिपाने के लिए थर्माकोल और फाइबर की फॉल्स सीलिंग बनाई गई थी। आशंका है कि बिजली के फॉल्ट से निकली चिंगारी ने देखते ही देखते आग का रूप ले लिया और थर्माकोल-फाइबर के जलने से निकले जहरीले धुएं ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया।
इस हादसे में कई लोगों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला और हादसा कुछ ही मिनटों में त्रासदी में बदल गया। घटनास्थल पर पहुंचे पूर्व छात्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, भवन की पूरी छत बिजली के तारों से भरी हुई थी। तारों में खराबी आने पर प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन बुलाने के बजाय संचालक खुद ही मरम्मत करता था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं यही लापरवाही हादसे की वजह तो नहीं बनी।
थर्माकोल और फाइबर ने बढ़ाया मौत का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि आग लगने के बाद थर्माकोल और फाइबर सबसे बड़ा खतरा बन गए। इनके जलने से निकला घना और जहरीला धुआं कुछ ही मिनटों में पूरे भवन में फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग से ज्यादा लोगों को धुएं ने अपनी चपेट में लिया। जांच में यह भी सामने आया है कि बिल्डिंग का नक्शा आवासीय इस्तेमाल के लिए स्वीकृत था, जबकि उसका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इसके बावजूद वर्षों तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
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हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य श्रीवास्तव का पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। मां कल्पना श्रीवास्तव बेटे के शव से लिपटकर बार-बार उसे पुकारती रहीं। परिजन के विलाप ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। डालीगंज निवासी भुवन श्रीवास्तव ने खिड़की से कूदकर अपनी जान बचा ली लेकिन उनके ममेरे भाई आदित्य की जान नहीं बच सकी। हादसे का जिक्र आते ही भुवन भावुक हो गए और कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं दिखे।
घायलों से मिले अखिलेश, एक करोड़ मुआवजे की मांग
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिलेश यादव
ने ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायलों का हाल जाना। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन होता तो इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी। उन्होंने मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा और घायलों का मुफ्त इलाज कराने की मांग की।
मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ
ने घटना को गंभीर चेतावनी बताते हुए प्रदेशभर में व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेसमेंट में कोचिंग सेंटर और नर्सिंग होम संचालित नहीं होने दिए जाएंगे। सभी प्रमुख संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच होगी।
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हादसे के बाद प्रदेशभर में सख्ती
घटना के बाद कई जिलों में कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच शुरू कर दी गई है। कई संस्थानों को सील किया गया है, जबकि दर्जनों संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं। अलीगंज का यह अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी, अवैध निर्माण और प्रशासनिक ढिलाई का खौफनाक नतीजा बनकर सामने आया है। अब सवाल यह है कि दोषियों पर कार्रवाई कितनी तेजी से होती है और क्या इस त्रासदी से भविष्य के लिए कोई सबक लिया जाएगा।