मध्य प्रदेश के शहर ग्वालियर में इन दिनों नगर निगम की एक लिस्ट चर्चा का केंद्र बनी हुई है। मार्च का महीना होने के कारण निगम अपनी खाली तिजोरी भरने के लिए टैक्स वसूली में जुटा है। इसी सिलसिले में निगम ने शहर के उन बड़े परिवारों और संस्थानों की लिस्ट तैयार की, जिन पर लाखों-करोड़ों का टैक्स बकाया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत माधवराव सिंधिया का नाम भी शामिल है, जिन पर करीब 33.32 लाख रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया दिखाया गया है।
हैरानी की बात यह रही कि यह सूची 10 मार्च को सार्वजनिक हुई, जो कि माधवराव सिंधिया की जन्मतिथि भी है। जैसे ही यह नाम सोशल मीडिया और वॉट्सऐप ग्रुप्स पर वायरल हुआ, शहर की राजनीति गरमा गई। समर्थकों के विरोध और बढ़ते विवाद को देखते हुए निगम के अधिकारियों ने आनन-फानन में सरकारी ग्रुप्स से इस लिस्ट को हटा लिया लेकिन तब तक यह खबर पूरे प्रदेश में फैल चुकी थी।
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निगम की खराब हालत और वसूली का दबाव
ग्वालियर नगर निगम फिलहाल भारी आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। आलम यह है कि कर्मचारियों को वेतन देने और ठेकेदारों के पुराने बिल चुकाने के लिए भी पैसे नहीं हैं। इसी दबाव के बीच 6 मार्च को हुई एक बैठक में टैक्स वसूली तेज करने का फैसला लिया गया था। बैठक में कांग्रेस पार्षदों ने जयविलास पैलेस और कटोरा ताल जैसी बड़ी संपत्तियों के टैक्स को लेकर सवाल उठाए थे, जिस पर बीजेपी पार्षदों के साथ उनकी तीखी बहस भी हुई थी।
सिंधिया परिवार के अलावा ये हैं बड़े बकायादार
नगर निगम की बकाया सूची में सिर्फ सिंधिया परिवार का नाम ही नहीं है बल्कि कई बड़े सरकारी संस्थान और अस्पताल भी शामिल हैं। सूची के अनुसार कई संस्थानों पर लाखों और करोड़ों रुपये का टैक्स बकाया है। प्रमुख संस्थानों और उन पर बकाया टैक्स इस प्रकार है:
कैंसर हॉस्पिटल – 51,94,30,470 रुपये
ग्वालियर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी – 2,93,08,434 रुपये
पीडब्ल्यूडी कलेक्टर बंगला – 46,83,733 रुपये
पीडब्ल्यूडी – 33,83,427 रुपये
सिविल हॉस्पिटल हजीरा – 31,77,109 रुपये
जिला पंचायत ऑफिस – 21,28,362 रुपये
चीफ इंजीनियर ऑफिस, पीडब्ल्यूडी – 20,47,231 रुपये
लक्ष्मीबाई शारीरिक शिक्षण संस्थान – 13,01,203 रुपये
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इस तरह नगर निगम की इस सूची में कई बड़े सरकारी विभाग और संस्थान भी बकाया करदाताओं में शामिल हैं। फिलहाल निगम के अधिकारी इस मामले पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि वे सभी संपत्तियों के पुराने रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।