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मध्य प्रदेश में UCC में क्या बदलेगा? विवाह, तलाक, लिव-इन और विरासत के नियम समझिए

मध्य प्रदेश के समान नागरिक संहिता से आदिवासियों को बाहर किया गया है। वे अपनी पंरपराओं और मान्यताओं का पालन, अपने तरीके से कर सकते हैं।

Mohan Yadav

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव। Photo Credit: MohanYadav/X

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मध्य प्रदेश कैबिनेट ने रविवार को भोपाल के जगदीशपुरा में विशेष बैठक बुलाकर यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को सर्वसम्मति से पास कर दिया। इस कानून का मकसद राज्य के सभी नागरिकों को शादी, संपत्ति, लिव-इन रिलेशनशिप और धार्मिक आजादी जैसे मामलों में बराबर अधिकार देना है।

समान नागरिक संहिता का मतलब, सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना और भरण-पोषण जैसे निजी मामलों में एक जैसा कानून बनाना होता है। यह कानून, व्यक्तिगत धार्मिक कानूनों को खत्म करता है और सबको एक कानून के दायरे में लाता है। 

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मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश:-
चाहे राम हो या रहीम, समान नागरिक संहिता सभी को बराबर अधिकार देने के लिए लाया गया है।

किन लोगों पर नहीं लागू होगा समान नागरिक संहिता?

मध्य प्रदेश सरकार ने साफ कहा है कि अनुसूचित जनजाति और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। संरक्षित इलाकों में रहने वाले आदिवासी इस कानून से प्रभावित नहीं होंगे।

मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश:-
अब केवल शब्‍दों से विवाह विच्‍छेद नहीं होगा। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान न्याय सुनिश्चित करना है।

मध्य प्रदेश के समान नागरिक संहिता में खास क्या है?

  • अब एक समय में सिर्फ एक ही शादी हो सकेगी
  • अगर जीवनसाथी जिंदा है तो दूसरी शादी नहीं की जा सकेगी
  • तलाक भी सिर्फ कोर्ट के जरिए और कानूनी प्रक्रिया से ही होगा
  • लड़के की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल रहेगी
  • सभी शादियों का पंजीकरण अनिवार्य होगा, पंचायत से लेकर नगर निगम तक इसके दायरे में होंगे
  • बेटे और बेटियां अब संपत्ति और विरासत में बराबर हकदार होंगे 

लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्ती क्यों?

शादीशुदा व्यक्ति अगर किसी दूसरे के साथ लिव-इन में रहेगा तो उसे 5 साल तक की जेल हो सकती है। लिव-इन करने वाले जोड़ों को एक महीने के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। उम्र भी शादी जितनी ही रखी गई है।

 

 



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धार्मिक आजादी मिलेगी या नहीं?

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि किसी की धार्मिक रीति-रिवाज, पूजा-पद्धति या समारोहों पर कोई रोक नहीं लगेगी। किसी भी धर्म का अपमान नहीं किया जाएगा। 

क्या है UCC का मकसद?

सरकार का कहना है कि इस कानून से महिलाओं की गरिमा बढ़ेगी, भेदभाव खत्म होगा, सामाजिक सद्भाव बढ़ेगा और देश की एकता मजबूत होगी। कानून बनाने से पहले आम लोगों से जिला और राज्य स्तर पर सुझाव लिए गए थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दावा किया कि मुस्लिम महिलाओं में 80 फीसदी और पुरुषों में 40 फीसदी लोगों ने इस एक समान कानून का समर्थन किया है।

विपक्ष ने क्या कहा है?

कांग्रेस ने इसे मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दी है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि बेरोजगारी, किसानों की समस्या और महंगाई जैसे बड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भारतीय जनता पार्टी यह कदम उठा रही है।

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