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चुनाव से पहले सरकार को झटका, EC ने लाड़की बहिन योजना की किस्त पर लगाई रोक

महाराष्ट्र में चुनाव आयोग ने लाडकी बहीण योजना की जनवरी की किस्त पर रोक लगा दी है। उसका कहना है कि यह आचार संहिता का उल्लंघन है।

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महिला लाभार्थी, Photo Credit- Social Media

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महाराष्ट्र में लाडकी बहिन योजना को लेकर बड़ा विवाद हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने सोमवार को सरकार को साफ कहा कि जनवरी की किस्त पहले से नहीं दी जा सकती, क्योंकि नगर निकाय चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू है।

 

यह मामला तब शुरू हुआ जब कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि लाडकी बहिन योजना की लाभार्थी महिलाओं को दिसंबर और जनवरी की दो किस्तें मिलाकर 3,000 रुपये 14 जनवरी से पहले उनके बैंक खाते में डाल दिए जाएंगे। इसे मकर संक्रांति का विशेष तोहफा बताया गया था।

 

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बताया गया था ‘खास गिफ्ट’

बीजेपी नेता और मंत्री गिरीश महाजन ने दावा किया था कि पात्र महिलाओं को 14 जनवरी से पहले ही 3,000 रुपये मिल जाएंगे। इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तरफ से ‘खास गिफ्ट’ कहकह प्रचारित किया गया था। हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग ने इस पर रोक लगा दी है। आयोग ने कहा कि नियमित या पहले की बाकी किस्तें दी जा सकती हैं, लेकिन आदर्श आचार संहिता के दौरान कोई एडवांस (अग्रिम) भुगतान नहीं किया जाएगा, क्योंकि आदर्श आचार संहिता लागू है और यह मतदाताओं को लुभाने जैसा होगा।

 

मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की मदद मिलती है। इस योजना की विधानसभा चुनाव के दौरान काफी तारीफ की गई थी और इसे 2024 के विधानसभा चुनाव में महायुति की जीत का बड़ा कारण माना जाता है।

विपक्ष ने लगाया आरोप

विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इसके जरिए वोट को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस ने शिकायत की कि मतदान से ठीक एक दिन पहले (14 जनवरी) महिलाओं पैसे देना गलत है। हालांकि, मुख्यमंत्री फडणवीस का कहना है कि यह योजना लगातार चल रही है और चुनाव आचार संहिता में इसके ऊपर कोई रोक नहीं है।

 

लेकिन महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकल और प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि वे योजना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन चुनाव से ठीक पहले दो महीने के पैसे एक साथ देना साफ तौर पर नियमों का उल्लंघन है।

 

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15 जनवरी को है चुनाव

सचिन सावंत ने कहा, ‘ये स्वार्थी भाई हैं, जो बहनों से वोट के रूप में 'रिटर्न गिफ्ट' मांगते हैं। ये पैसा टैक्सपेयर्स का है, सत्ताधारी का निजी सामान नहीं। बहनों को इन स्वार्थी भाइयों को उनकी जगह दिखानी चाहिए।’ महाराष्ट्र में 29 नगर निकाय के लिए चुनाव 15 जनवरी को होने वाले हैं, ऐसे में यह विवाद काफी गरमा गया है। नतीजों की घोषणा 16 जनवरी को की जाएगी।

 


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