महाराष्ट्र में किसान सूखे के कारण परेशान रहते हैं और किसानों की आत्महत्या एक बड़ा मुद्दा बन गया है। किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या सिंचाई के पर्याप्त साधन ना होना ही है। करीब चार साल पहले जुलाई 2022 में जब महाराष्ट्र मे एकनाथ शिंदे और बीजेपी ने मिलकर सरकार बनाई थी तब से सरकार ने 225 सिंचाई प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन प्रस्तावों में 1.18 लाख करोड़ रुपये की नए प्रोजेक्ट शामिल थे और 60 हजार करोड़ रुपये पहले से चले आ रहे प्रोजेक्ट्स के लिए मंजूर किए गए थे। पिछले हफ्ते सिंचाई विभाग ने महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में यह डेटा पेश किया।
कैबिनेट मीटिंग में सिंचाई विभाग की ओर से पेश किए गए डेटा के अनुसार, इन सभी 225 प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए पहले से मंजूर राशि से 2.56 लाख करोड़ रुपये ज्यादा की जरूरत होगी। पिछली सरकार ने सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े जो आदेश दिए थे उनमें ज्यादातर आदेश मराठवाड़ा और विदर्भ से जुड़े हुए थे। बता दें कि इन दोनों क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सूखा पड़ता है लेकिन सिंचाई से जुड़े प्रोजेक्ट्स पूरे ना होने के कारण किसानों में रोष है।
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लगातार बढ़ रही लागत
महाराष्ट्र में यह महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाएं पूरा होने के बजाय लटकती जा रही हैं। जुलाई 2022 में जब महायुति गठबंधन की सरकार बनी थी तब गठबंधन ने आरोप पिछली सरकारों पर लगाया था। आरोप था कि कांग्रेस-NCP सरकार एक सिंचाई घोटाले में शामिल थी और उनके आदेशों के कारण लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, अब महायुति की सरकार को भी 4 साल का समय हो चुका है पर स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं है। प्रोजेक्ट्स की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले हफ्ते कैबिनेट मीटिंग में पेश किए गए डेटा से पता चलता है कि सरकार बदलने के बावजूद यह सिलसिला जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि काम का दायरा बढ़ने के कारण लागत में बढ़ोतरी हो रही है। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण की पर भी लागत बहुत ज्यादा आ रही है। सिंचाई विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, पैसे की जरूरत इन परियोजनाओं के लिए बड़ी लगती है लेकिन इसमें हाल ही में मंजूर की गई नदी परियोजनाओं की लागत भी शामिल है।
सिंचाई मंत्री ने क्या बताया?
महाराष्ट्र सरकार में सिंचाई मंत्री गिरीश महाजन ने सिंचाई परियोजनाओं में लगातार बढ़ती लागतों से जुड़े सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'कई प्रोजेक्ट 25-25 साल से चल रहे हैं। कई प्रोजेक्ट्स को मंजूरी तो मिली लेकिन उन्हें समय-सीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया। इस दौरान जमीन अधिग्रहण की दरें कई गुना बढ़ गईं। लागत में बढ़ोतरी का यही मुख्य कारण है।' अधिकारी और मंत्री जमीन अधिग्रहण को लागत में बढ़ोतरी का मुख्य कारण मान रहे हैं। हालांकि, सवाल उठता है कि जब प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई तो जमीन अधिग्रहण में इतना समय क्यों लगा।
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नए प्रोजेक्ट शुरू हो रहे पुराने अटक रहे
सिंचाई मंत्री और अधिकारी भले ही दावा करें कि लागत में बढ़ोतरी जमीन अधिग्रहण की लागत बढ़ने के कारण हुआ है लेकिन सिंचाई क्षेत्र से जुड़े जानकार इस बात को नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक कारणों से इन परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है। सिंचाई पर एक किताब लिखने वाले और मुखर होकर अपनी राय रखने वाले सुधीर भोंगले ने बढ़ती लागत पर अपनी राय रखी है।
उन्होंने कहा, 'हमारी सरकारों ने षेत्रीय राजनीतिक नेताओं को खुश करने के लिए या चुनावों को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं को मंजूरी दी। सरकार चाहे इन परियोजनाओं को पूरा भी ना कर पाए। हर साल इन प्रोजेक्ट्स के लिए पर्याप्त पैसा नहीं होता। यही कारण है कि कोई भी परियोजना पूरी नहीं हो पाती।' उनका कहना है कि सरकार को नई परियोजनाओं की घोषणा करने के बजाय पुरान परियोजनाओं को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए।