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10वीं पास को मिल रही थी 85 हजार की सैलरी, 225 करोड़ के घोटाले की कहानी

मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने 225 करोड़ के कोऑपरेटिव फ्रॉड केस में कंपनी की महिला 10वीं पास एक कोषाध्यक्ष की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

Malaika Multi state Credit Cooperative Society fraud

प्रतीकात्मक तस्वीर।

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महाराष्ट्र की एक स्पेशल कोर्ट ने 10वीं पास एक कंपनी की महिला कोषाध्यक्ष को 225 करोड़ के कोऑपरेटिव फ्रॉड केस में पहली नजर में ही उसकी भूमिका पाई, जिसके बाद उसकी जमानती अर्जी खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि 10वीं पास महिला बिना किसी तकनीकी जानकारी के कंपनी से 85,000 रुपये महीने की सैलरी ले रही थी। आरोपी महिला कोषाध्यक्ष का नाम एल्सी रोड्रिग्स है। दरअसल, कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज किए गए 225 करोड़ रुपये के मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी फ्रॉड केस की सुनवाई कर रही थी। 

 

कोर्ट ने कहा कि आरोपी एल्सी रोड्रिग्स ने 'मलाइका मल्टी-स्टेट क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी' की नामित कोषाध्यक्ष और एक लिंक्ड कंपनी में शेयरहोल्डर के तौर पर अपराध से हुई कमाई को इधर-उधर करने में मुख्य आरोपी की सक्रिय तौर पर मदद की थी।

ईडी ने 2024 में दर्ज किया था केस

ईडी ने 2024 में एल्सी रोड्रिग्स और कंपनी के मालिक गिल्बर्ट बैपटिस्ट के खिलाफ केस दर्ज किया था। दोनों मिलकर कंपनी को नियंत्रित करके चलाते थे। ईडी की चार्जशीट के मुताबिक दोनों आरोपियों ने अलग-अलग जमाकर्ताओं से इकट्ठा किए गए 225 करोड़ रुपये के फंड का व्यक्तिगत इस्तेमाल किया था।

 

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कोर्ट ने क्या सुनवाई में कहा?

स्पेशल जज आर बी रोटे ने 13 फरवरी को एक ऑर्डर सुनाया। सुनवाई करते हुए जज ने कहा कि शिकायत में एल्सी रोड्रिग्स की भूमिका खास तौर पर बताई गई है। वह मुख्य आरोपी गिल्बर्ट बैपटिस्ट की करीबी थी। इसके अलावा रोड्रिग्स की पढ़ाई सिर्फ 10वीं पास थी। मगर, वह कंपनी की डायरेक्टर में से एक होने के साथ-साथ 10.18% शेयरहोल्डर भी थी। इसके अलावा, उसे बिना कोई असरदार काम किए या कोई टेक्निकल एक्सपर्टीज के लगभग 85,000 रुपये प्रति महीने की सैलरी मिल रही थी। इससे वह अपनी सैलरी को जस्टीफाइ नहीं कर सकी।

 

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जस्टीफाई नहीं कर सकी सैलरी

हालांकि, एल्सी रोड्रिग्स ने अपनी जमानती अर्जी में कहा था कि वह क्रेडिट सोसाइटी और उससे जुड़ी कंपनी के मामलों की इंचार्ज नहीं थी। रोड्रिग्स ने कहा कि उन्होंने सेक्रेटरी के तौर पर कंपनी के डायरेक्टरों के निर्देशों के अनुसार ही चेक अधिकृत किए थे। रोड्रिग्स ने यह भी कहा था कि वह कथित अपराध की कमाई की लाभार्थी नहीं है और उन्हें जो सैलरी मिली थी, वह एक सही वैध उद्देश्य और स्रोत से मिल रही थी।

मालिक ने किया मालामाल

केंद्रीय एजेंसी के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अरविंद अघव ने कहा कि कंपनी के 52 निवेशकों में से ज्यादातर सीनियर सिटिजन थे। सभी के बयान रिकॉर्ड किए गए हैं। सबूतों से पता चलला है कि मीरा रोड पर मौजूद क्रेडिट कंपनी में निवेश किए गए 12,372 से ज्यादा निवेशकों का पैसा डूब गया था। उन्होंने कहा कि एल्सी रॉड्रिक्स को मुख्य आरोपी ने 1.65 करोड़ रुपये की तीन प्रॉपर्टी खरीदने में मदद की थी। इसके अलावा रॉड्रिक्स ने गिल्बर्ट बैपटिस्ट की अलग-अलग कंरनियों के जरिए 78.15 लाख रुपये भी लिए थे।

 

कोर्ट ने आगे कहा, 'अपराध की प्रकृति, एप्लीकेंट (एल्सी रॉड्रिक्स) को दी गई खास भूमिका और रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री को देखते हुए ऐसा लगता है कि एप्लीकेंट अपनी जमानत के लिए पहली नजर में कोई केस बनाने में नाकाम रही है। रॉड्रिक्स और आरोपी बैपटिस्ट के खिलाफ केस को आगे बढ़ने और चार्ज फ्रेम करने के लिए ईडी रिकॉर्ड में काफी सबूत है।'

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