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मादा की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर चला आया नर बाघ, अब पकड़कर होगी जांच

बुक्सा टाइगर रिज़र्व में पिछले दिनों एक नर बाघ अपने साथी मादा बाघ की तलाश में लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय करता हुआ देखा गया। इस बाघ को रविवार को कैमरे में कैद किया गया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit: PTI

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पश्चिम बंगाल के बुक्सा टाइगर रिजर्व में पिछले हफ्ते गुरुवार को काफी रोचक घटना देखने को मिली। जहां वन अधिकारियों के अनुसार, 15 जनवरी की रात रिजर्व क्षेत्र में एक बाघ दिखाई दिया, जिसकी तस्वीर कैमरे में कैद हुई। अधिकारियों का कहना है कि यह बाघ बीते कुछ दिनों में सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर चुका है। इसे देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि वह अपने लिए मादा बाघ की तलाश में इतनी लंबी दूरी तय करके आया है।


इस घटना पर बुक्सा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि आमतौर पर बाघ दो कारणों से एक जगह से दूसरी जगह पर जाते हैं। पहला कारण यह हो सकता है कि बाघ पूरी तरह से विकसित यानी कि उम्र में छोटा हो और दूसरा कारण यह हो सकता है कि वह मादा बाघ की तलाश में यहां तक पहुंच गया हो। उन्होंने कहा कि चूंकि यह बाघ पूरी तरह से वयस्क लग रहा है, इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि वह मादा बाघ की खोज में ही इतनी लंबी दूरी तय करके आया हो।

 

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लंबे समय बाद दिखा बाघ

बुक्सा टाइगर रिजर्व को कभी बाघों का घर कहा जाता था, लेकिन वहां 31 दिसंबर 2023 के बाद से एक भी बाघ नहीं देखा गया। ऐसे में 15 जनवरी को नर बाघ का दिखना एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। पिछले पांच सालों से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण बुक्सा टाइगर रिज़र्व में बाघों को लाने और संरक्षित करने का काम कर रहा है।

 

हालांकि, कई वन्यजीव विशेषज्ञों (वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स) का मानना है कि यदि रिजर्व में मादा बाघों को नहीं लाया गया तो नर बाघ भी वहां पर लंबे समय तक नहीं रह पाएंगे। दरअसल, बुक्सा टाइगर रिजर्व की सीमाएं असम के मानस टाइगर रिजर्व और भूटान से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में यह संभावना भी जताई जा रही है कि यह बाघ असम या भूटान से होते हुए बुक्सा तक पहुंचा हो।

 

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दर्ज की जाती है जानकारी

वन विभाग के अनुसार, बाघ की तस्वीर 15 जनवरी की रात 8:19 बजे पश्चिमी क्षेत्र में स्थित राजाभटखावा रेंज में लगे कैमरे में कैद हुई। अब विश्लेषण के लिए इस तस्वीर को जल्द ही वन्यजीव संस्थान को भेजा जाएगा। इसके बाद विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से बाघ की पहचान करके उसे एक खास संख्या दे दी जाएगी।


इस प्रक्रिया से बाघों का डिजिटल डेटाबेस तैयार होता है, जिससे उनकी गिनती करने और मॉनीटरिंग में आसानी होती है। इस डेटा के माध्यम से यह भी पता लगाया जा सकता है कि बाघ को पहले कभी रिजर्व में देखा गया था या नहीं। उदाहरण के तौर पर वर्ष 2021 में एक बाघ को देखा गया था, जिसकी जानकारी पहले डेटाबेस में मौजूद नहीं थी, इसलिए उसे डेटा भी डेटाबेस में जोड़ा गया।

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