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अब किताब विवाद में फंसीं ममता बनर्जी, 19 बुक नहीं लौटाई तो होगी कार्रवाई

ममता बनर्जी से विधानसभा की लाइब्रेरी की 19 किताबें लौटाने को कहा गया है। किताबें वापस नहीं करने पर सरकार कार्रवाई कर सकती है।

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ममता बनर्जी, Photo Credit- Social Media

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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर विवादों में हैं। मामला विधानसभा की लाइब्रेरी से ली गई किताबों का है। राज्य सरकार ने ममता बनर्जी से इन किताबों को वापस करने को कहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने लाइब्रेरी से 19 किताबें ली थीं जिन्हें लौटाने का समय अब निकल चुका है। सरकार का कहना है कि अगर किताबें वापस नहीं की गईं तो लाइब्रेरी के नियमों के तहत आगे कार्रवाई की जा सकती है।

 

ममता बनर्जी ने अधिकारियों को बताया है कि ये किताबें उनके पास नहीं हैं। वहीं लाइब्रेरी अधिकारियों का कहना है कि किताबें अभी वापस नहीं मिली हैं। इस मामले को लेकर सरकार और ममता बनर्जी के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है।

 

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किताबें नहीं लौटाई तो क्या होगा?

राज्य सरकार में मंत्री गौरी शंकर घोष ने कहा है कि लाइब्रेरी के नियमों के अनुसार, तय समय के बाद किताब नहीं लौटाने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर कोई किताब खो जाती है या खराब हो जाती है तो उसकी जगह नई कॉपी देकर भरपाई करनी होती है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के मामले में भी लाइब्रेरी के नियमों के अनुसार, कार्रवाई की जाएगी।

 

घोष के मुताबिक, लाइब्रेरी अधिकारियों ने ममता बनर्जी से किताबें वापस करने के लिए कई बार कहा है। इसके लिए नोटिस भी भेजे गए लेकिन अभी तक उनका जवाब नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अगर किताबें वापस नहीं की गई तो जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। अधिकारियों को यह भी बताया गया है कि किताबें ममता बनर्जी के पास नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि ये किताबें मुख्यमंत्री के कमरे में रखी हो सकती हैं। फिलहाल उस कमरे में मौजूदा मुख्यमंत्री की जगह शुभेंदु अधिकारी बैठते हैं। 

 

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ममता की किताबों पर भी विवाद

इस मामले के साथ ममता बनर्जी की लिखी किताबों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। मंत्री गौरी शंकर घोष ने आरोप लगाया है कि पहले सरकारी लाइब्रेरियों को ममता बनर्जी की लिखी किताबें खरीदने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने खास तौर पर ‘एपांग ओपांग झपांग’ नाम की किताब का जिक्र किया।

 

घोष ने कहा कि सरकारी लाइब्रेरियों में ऐसी किताबें नहीं रखी जाएंगी जिन्हें वे जरूरी नहीं मानते। उनका कहना है कि लाइब्रेरियों में अब भारतीय इतिहास और संस्कृति के साथ स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, काजी नजरुल इस्लाम और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे लोगों से जुड़ी किताबों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।


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