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बकरे को जलाकर खुद को मृत दिखाया, 18 महीने बाद गिरफ्तार हुआ हत्या का आरोपी

UP के जिला मऊ में हत्यारोपी ने सजा से बचने के लिए खुद को मृत दिखाकर बकरे को जलाकर अंतिम संस्कार कर दिया। 18 महीने बाद पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया।

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पुलिस हिरासत में पकड़ा गया आरोपी, Photo Credit : Social Media

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उत्तर प्रदेश के मऊ से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। वर्ष 2016 के हत्या के एक मामले में वांछित आरोपी ने कथित तौर पर कानून से बचने के लिए अपनी मौत का पूरा नाटक रच डाला। आरोप है कि उसने खुद को मृत दिखाने के लिए बेहोशी से लेकर अंतिम संस्कार तक की कहानी तैयार कराई। यहां तक कि बकरे की देह जलाकर लोगों को अपनी मौत का यकीन दिलाने और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का भी दावा किया गया है। परिवार में उसकी तेरहवीं तक कर दी गई, जबकि वह कथित तौर पर जिंदा रहकर पुलिस से बचता रहा। करीब 18 महीने तक फरारी काटने के बाद आखिरकार मऊ पुलिस ने उसे ख्वाजाहापुर गांव से गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस कथित फर्जी दस्तावेजों, बीमा भुगतान और इस साजिश में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजू उर्फ राजकुमार राजभर के रूप में हुई है। करीब 38 वर्षीय राजकुमार स्टेडियम के पास ख्वाजाहापुर क्षेत्र का निवासी बताया गया है। उसके खिलाफ वर्ष 2016 में योगेश सिंह की हत्या के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले की सुनवाई न्यायालय में चल रही थी।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को आशंका थी कि हत्या के मुकदमे में उसे आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। इसी डर से उसने कथित तौर पर अपनी मौत का झूठा सबूत तैयार कराकर पुलिस और कानूनी कार्रवाई से बचने की योजना बनाई।

बेहोशी से लेकर अंतिम संस्कार तक रची मौत की कहानी

पुलिस के दावे के मुताबिक, आरोपी को कथित तौर पर बेहोश दिखाकर अस्पताल ले जाने का नाटक किया गया। इसके बाद तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें इस तरह पेश किया गया, मानो उसकी मौत हो चुकी हो और शव अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पर रखा गया हो।आरोप है कि लोगों को उसकी मौत का विश्वास दिलाने के लिए बकरे की देह जलाई गई। इस तरह कथित तौर पर यह दिखाने की कोशिश की गई कि राजकुमार की मृत्यु हो गई है और उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है। इसके बाद गाजीपुर जिले से उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए जाने की बात सामने आई है।हालांकि, इस कथित साजिश से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि मृत्यु प्रमाण पत्र किन दस्तावेजों के आधार पर तैयार हुआ और इसमें किन लोगों ने मदद की।

 

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पत्नी ने की तेरहवीं, बीमा की रकम भी जांच के दायरे में

मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी की पत्नी को उसकी मौत की सूचना दी गई थी। परिवार ने भी उसे मृत मानकर परंपरा के अनुसार तेरहवीं कर दी।पुलिस अब करीब 10 लाख रुपये की कथित बीमा राशि के भुगतान की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि बीमा कंपनी को कौन से दस्तावेज दिए गए थे और क्या कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करके रकम हासिल की गई थी।फिलहाल बीमा भुगतान में किसी तरह की धोखाधड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस मामले में बीमा संबंधी नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और आरोपी की कथित मौत की कहानी का इससे कोई संबंध था या नहीं।

शेयर मार्केट और क्रिप्टोकरेंसी कारोबार से भी जुड़ा था आरोपी

पुलिस के मुताबिक, राजकुमार पहले मुंबई में काम करता था। बाद में वह शेयर मार्केट ट्रेडिंग और क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार से जुड़ गया। बताया जा रहा है कि उसके इस कारोबार में कई लोगों ने पैसा लगाया था। इनमें दो होम्योपैथिक डॉक्टरों के नाम भी सामने आए हैं।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर दावा किया कि दोनों डॉक्टरों ने उसे खुद को मृत घोषित कराने की सलाह दी थी। पुलिस इस दावे की सत्यता की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित साजिश के पीछे हत्या के मुकदमे में सजा से बचने के अलावा निवेशकों का पैसा लौटाने से बचने का उद्देश्य भी था या नहीं।हालांकि, दोनों डॉक्टरों की भूमिका अभी साबित नहीं हुई है। पुलिस साक्ष्यों के आधार पर उनकी भूमिका की पड़ताल करेगी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

18 महीने तक बदलता रहा ठिकाना

पुलिस के अनुसार, आरोपी अपनी कथित मौत का नाटक रचने के बाद करीब 18 महीने तक फरार रहा। इस दौरान वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था, जिससे पुलिस को उसे पकड़ने में परेशानी हो रही थी।अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार के मुताबिक, पुलिस टीम उसकी तलाश में जुटी थी। इसी दौरान मुखबिर से ख्वाजाहापुर गांव में उसके मौजूद होने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फरारी के दौरान उसने कहां-कहां शरण ली और कथित तौर पर खुद को मृत दिखाने की योजना को अंजाम देने में किसने मदद की।

 

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फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वालों की भी होगी जांच

मऊ पुलिस अब इस मामले में कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करने, तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करने और अन्य दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं।इसके साथ ही बीमा भुगतान, निवेशकों के पैसों और दो डॉक्टरों की कथित भूमिका से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि क्या उसने हत्या के मुकदमे में सजा से बचने के लिए अपनी मौत का नाटक रचा था या इस कथित साजिश के पीछे आर्थिक लेन-देन से जुड़े दूसरे कारण भी थे। पुलिस की जांच और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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