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सियांग पर 11,000 MW का मेगा डैम, बांध से क्यों डरी पूरी घाटी?

पूर्वोत्तर भारत की सियांग घाटी 'आदि' जनजाति की लाइफ लाइन मानी जाती है। अभी अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,000 मेगावाट का SUMP इस समुदाय के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

Siang Valley

सियांग घाटी, Photo Credit- Social Media

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देश में जब 11,000 मेगावाट (11 GW) बिजली की बात करते हैं तो यह एक बहुत बड़ा आंकड़ा है। देश में सबसे बड़ा चालू थर्मल पावर प्लांट विंध्याचल में हैं जिसकी क्षमता 4,760 MW है। साथ ही सबसे बड़ा हाइड्रो प्रोजेक्ट (टिहरी) 2,400 MW का है। यानी अगर यह प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो जाता है तो अकेले 'सियांग अपर मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट' (SUMP) की क्षमता भारत के सबसे बड़े चालू हाइड्रो प्रोजेक्ट से चार गुना से भी अधिक होगी।

 

इस बड़े प्रोजेक्ट का विरोध हो रहा है। अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विनाश के डर से चेतावनी दी गई है। खासकर आदि समुदाय जो इस प्रोजेक्ट का काफी विरोध कर रहा है। समुदाय ने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने के लिए कहा है।

 

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सियांग घाटी की महत्ता

आपको बता दे कि सियांग घाटी अरुणाचल प्रदेश में है। यहां से ही सियांग नदी निकलती है जो असम में आने से पहले ब्रह्मपुत्र नदी बन जाती है। सियांग नदी तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो के रूप में निकलती है। यहां आदि, निशि, मेम्बा, खाम्बा और इदु मिश्मी जैसे मूल निवासी समूह रहते हैं। यहां कई प्रजातियां रहते हैं जिसकी सुरक्षा के लिए काम किया जाता है। इस प्रोजेक्ट से कई तरह के बड़े-छोटे नुकसान हो सकते हैं जिसका आकलन करना जरूरी है।

विवाद के 3 मुख्य कारण

सामान्य तौर पर किसी भी पावर प्रोजेक्ट पर विवाद मुआवजे या पेड़ों की कटाई तक सीमित रहता है। लेकिन आदि जनजाति के लिए सियांग नदी पर 11,000 MW का डैम बनना सिर्फ जमीन खोने की बात नहीं है। इसके पीछे 3 बड़े कारण हैं।सबसे पहला, आदि समुदाय की पहचान और उनका सबसे पवित्र त्योहार 'सोलुंग' पूरी तरह से सियांग नदी के बहाव और उसकी घाटी पर आधारित है। इतनी बड़ी क्षमता वाले डैम के लिए जलाशय बनाया जाएगा जो सैकड़ों किलोमीटर में फैले गांवों और पवित्र जगहों को हमेशा के लिए डूबा देगा।

 

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दूसरा, सियांग घाटी हिमालय की उस पट्टी में है जो जियोलॉजिकल रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील और भूकंप-संभावित क्षेत्रों में आती है। बड़े बांध में जब अरबों टन पानी जमा होगा तो जमीन के नीचे भारी दबाव बनेगा। स्थानीय लोगों और वैज्ञानिकों को डर है कि इससे इस पूरे क्षेत्र में भूकंप और भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। तीसरा, इतनी ज्यादा मात्रा में बिजली पैदा करने के लिए नदी के पानी को सुरंगों और जलाशयों के जरिए कंट्रोल किया जाएगा। इसका सीधा असर निचले इलाकों खासकर असम और अरुणाचल के मैदानी हिस्सों पर पड़ेगा। इस वजह से बाढ़ का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।


आदि समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख संगठन ने ईटानगर से अरुणाचल सरकार को SUMP को तुरंत रद्द करने का आग्रह किया है। क्योंकि वह इसे अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानते हैं। सियांग घाटी न केवल रणनीतिक रूप से संवेदनशील है बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत की एक प्रमुख लाइफ लाइन मानी जाती है। इस पर इस तरह के विशाल प्रोजेक्ट का विरोध होना स्वाभाविक है।


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