बिहार में सुपौल पुलिस ने मानव तस्करी और नाबालिग बच्चियों के शोषण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। यहां जिले के अलग-अलग इलाकों में चलने वाले ऑर्केस्ट्रा में नाबालिग बच्चियों से काम कराया जा रहा था। उनसे रात में देर तक डांस कराया जाता था और उनका शारीरिक व मानसिक शोषण किया जाता था। पुलिस को इसकी गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस ने 10 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया। पुलिस ने मुक्त कराई गई बच्चियों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सुपुर्द कर दिया है।
इसके अलावा, इस मामले में संलिप्त 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। एसपी शरथ आरएस ने जानकारी देते हुए बताया कि सूचना प्राप्त हुई थी कि जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में चल रहे ऑर्केस्ट्रा के ठिकानों पर नाबालिग बालिकाओं से काम कराया जा रहा है। उनसे अश्लील डांस कराया जाता है और देर रात तक कार्यक्रम कराया जाता है। उन्होंने बताया कि उनका शारीरिक और मानसिक शोषण किया जाता है।
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सूचना मिलते ही एक्शन में आई पुलिस
नाबालिग बच्चियों को सुरक्षा उपलब्ध कराने और उनके शोषण पर रोक लगाने के उद्देश्य से सुपौल पुलिस ने ऑर्केस्ट्रा संचालकों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के तहत 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कई संचालक अपने ठिकाने छोड़कर फरार हो गए हैं। पुलिस ने बताया कि सूचना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में एएचटीयू, एसजेपीयू और महिला थाना की पुलिस टीम को शामिल करते हुए एक विशेष टीम का गठन किया गया।
टीम में महिला पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को भी शामिल किया गया था ताकि बच्चियों से सही तरीके से पूछताछ हो सके। गठित टीम को प्राप्त सूचना का सत्यापन कर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद पुलिस टीम ने जिले के त्रिवेणीगंज, छातापुर, राघोपुर, सुपौल, निर्मली सहित कई थाना क्षेत्रों में संचालित ऑर्केस्ट्रा के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। मुक्त कराई गईं 10 नाबालिग लड़कियों की उम्र 13 से 17 साल के बीच बताई जा रही है।
ये बच्चियां बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल, असम और नेपाल की रहने वाली हैं। इन बच्चियों को बहला-फुसलाकर, नौकरी और अच्छे पैसे का लालच देकर लाया गया था और ऑर्केस्ट्रा में काम कराया जा रहा था। पुलिस की पूछताछ में बच्चियों ने बताया कि उनसे जबरन काम कराया जाता था। दिन में उन्हें एक कमरे में बंद रखा जाता था। रात में स्टेज पर डांस कराया जाता था। पैसे भी नहीं दिए जाते थे। विरोध करने पर मारपीट की जाती थी। खाने-पीने की भी सही व्यवस्था नहीं थी।
बच्चियों की तस्करी कर ऑर्केस्ट्रा में कराया जाता था काम
पुलिस ने बच्चियों का मेडिकल जांच कराया है और उन्हें चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के हवाले कर दिया है। सीडब्ल्यूसी बच्चियों की काउंसलिंग कर रही है और उनके परिवार वालों से संपर्क करने की कोशिश कर रही है। इस मामले में पुलिस ने 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में ऑर्केस्ट्रा संचालक, मैनेजर और दलाल शामिल हैं। इन सभी से पूछताछ की जा रही है।
एसपी ने बताया कि यह एक संगठित गिरोह है जो नाबालिग बच्चियों की तस्करी कर ऑर्केस्ट्रा में काम कराता है। इस गिरोह के तार कई जिलों और राज्यों से जुड़े हैं। पुलिस इस नेटवर्क को खंगाल रही है। इस मामले में मानव तस्करी, पॉक्सो एक्ट, बाल श्रम निषेध अधिनियम और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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ऑर्केस्ट्रा संचालकों को कराना होगा बच्चियों का सत्यापन
एसपी शरथ आरएस ने कहा कि नाबालिग बच्चियों के शोषण के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा। जिले में कहीं भी ऑर्केस्ट्रा की आड़ में नाबालिग बच्चियों से काम कराया जा रहा है तो उसकी सूचना पुलिस को दें। सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी। उन्होंने ऑर्केस्ट्रा संचालकों को भी चेतावनी दी है कि अगर किसी भी ऑर्केस्ट्रा में नाबालिग बच्चियां काम करते पाई गईं तो संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सभी ऑर्केस्ट्रा संचालकों को अपने यहां काम करने वाली बच्चियों का सत्यापन कराना होगा। नाबालिग बच्चियों को काम पर रखना गैरकानूनी है। इस कार्रवाई के बाद जिले में ऑर्केस्ट्रा संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। कई संचालकों ने अपने ऑर्केस्ट्रा बंद कर दिए हैं। कई अपने ठिकाने छोड़कर फरार हो गए हैं। लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है।