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MP: दो से अधिक बच्चों वाले भी सरकारी नौकरी के पात्र, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

मध्य प्रदेश में दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। मोहन यादव सरकार ने 20 साल पुराने उस नियम को हटाने के निर्देश दिए हैं। जो सरकारी नौकरी और प्रमोशन में बाधा बनता था।

Madhya Pradesh 2 Child Norm For Government Employees

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, Photo Credit: ANI

मध्य प्रदेश सरकार सरकारी नौकरियों से जुड़े एक चर्चित नियम में बड़ा बदलाव करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश दिया है कि सरकारी सेवा में भर्ती के लिए लागू दो-बच्चों की शर्त को समाप्त किया जाए। इसके साथ ही उस मसौदा नियम को भी वापस लेने के लिए कहा गया है, जिसमें दो से अधिक जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना गया था।

 

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संबंधित विभाग ने नियमों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से बड़ी संख्या में युवाओं और सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलेगी। लंबे समय से इस नियम को लेकर विभिन्न वर्गों की ओर से आपत्तियां और पुनर्विचार की मांग उठाई जा रही थी।

 

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2001 में लागू किया गया था नियम

मध्य प्रदेश में दो-बच्चों का नियम वर्ष 2001 में जनसंख्या नियंत्रण नीति के तहत लागू किया गया था। इसके अनुसार 26 जनवरी 2001 के बाद जिन उम्मीदवारों के दो से अधिक जीवित बच्चे थे उन्हें सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों के लिए अयोग्य माना जाता था। इस कारण कई उम्मीदवार सरकारी सेवा में आवेदन करने से भी वंचित रह जाते थे।

 

यह नियम सिर्फ नई भर्ती तक सीमित नहीं था। मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के तहत सरकारी कर्मचारियों के लिए भी दो से अधिक बच्चों का होना अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना जाता था। इससे सेवा में कार्यरत कर्मचारियों पर भी इसका प्रभाव पड़ता था। कई कर्मचारी संगठनों ने समय-समय पर इस प्रावधान को हटाने की मांग की थी।

 

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नया मसौदा होगा जारी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्देश दिया है कि दो से अधिक बच्चों के आधार पर अयोग्यता से जुड़े सभी प्रावधान हटाकर नया मसौदा तैयार किया जाए। साथ ही पुराने मसौदे को सरकारी पोर्टल से हटाने को भी कहा गया है। संशोधित मसौदा तैयार होने के बाद उसे दोबारा सार्वजनिक किया जाएगा। गौरतलब है कि राजस्थान ने 2016 में और छत्तीसगढ़ ने 2017 में इसी तरह की पाबंदियां समाप्त कर दी थीं। अब मध्य प्रदेश भी इसी राह पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि इस फैसले से हजारों नौकरी अभ्यर्थियों को लाभ मिलेगा।


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