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हिंसा और कई घरों में तोड़फोड़, अरुणाचल में बांध का विरोध क्यों?

अरुणाचल प्रदेश में ग्रामीणों का एक गुट सियांग बांध का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा समूह विरोध में है। अब विरोधी समूह ने बांध समर्थक समूह के घरों पर हमला किया है।

Arunachal Pradesh

अरुणाचल प्रदेश में सियांग बांध प्रोजेक्ट का विरोध। (AI-generated image)

तिब्बत में चीन यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा बांध (60,000 मेगावाट) बना रहा है। इसके जवाब में भारत अब अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर सियांग बांध बना रहा है, ताकि चीन के बांध से पड़ने वाले असर से निपटा जा सके। मगर अरुणाचल प्रदेश में इस प्रोजेक्ट का विरोध होने लगा है। 

 

बता दें कि तिब्बत की यारलुंग त्सांगपो नदी अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी के रूप में जानी जाती है। असम में दिबांग और लोहित नदियों के मिलने के बाद इसका नाम ब्रह्मपुत्र हो जाता है।

दो दिन पहले 110 परिवारों ने किया था समर्थन

दो दिन पहले अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और विधायक ओनी पन्यांग ने ऐलान किया था कि सियांग नदी के किनारे बसे गेकू गांव के 110 परिवारों ने सियांग अपर मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट के समर्थन में एक समझौता ज्ञापन पर साइन किया है।

 

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विधायक के आवास पर भी हमला

इस बीच बांध परियोजना का विरोध करने वाले समूहों ने सोमवार को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले ग्रामीणों और स्थानीय विधायक ओनी पन्यांग के आवास पर हमला किया। कई घरों में तोड़फोड़ की गई। अब प्रशासन ने अपर सियांग जिले में निषेधाज्ञा लागू कर दी है, ताकि संभावित हिंसा को रोका जा सके। विरोधियों का मानना है कि प्रोजेक्ट के चलते उनके घर और खेत छिन जाएंगे।

2017 से प्रस्तावित है सियांग बांध परियोजना

सियांग अपर मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट 11,000 मेगावाट की एक परियोजना है। 2017 में इसका प्रस्ताव रखा गया था। समय-समय पर कई समूहों ने प्रोजेक्ट का विरोध किया। विरोध करने वालों में वह लोग शामिल हैं, जिनके घर औरर खेत परियोजना से प्रभावित होंगे। हाल ही में नदी किनारे बसे गेकू गांव के 110 परिवारों ने प्रोजेक्ट का समर्थन किया। यही बात प्रोजेक्ट के खिलाफ वाले समूहों को पसंद नहीं आई।

 

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एक कार्यकारी आदेश में सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और लोगों के जमावड़े पर रोक लगा दी गई है। आदेश में कहा गया कि बांध का विरोध करने वाले समूह प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट का समर्थन करने वाले लोगों के घरों औरर संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है। आशंका है कि विरोधी समूह हिंसा, धमकी, सार्वजनिक व प्रोजेक्ट समर्थक ग्रामीणों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा स्थिति को और अधिक बिगाड़ सकते हैं।  

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