बिहार के पटना जिले के पुनपुन प्रखंड के समकुड़ा गांव में एक मिट्टी और खपरैल वाले मकान से 40 से अधिक जहरीले सांप निकलने के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। राहत की बात यह रही कि इतनी बड़ी संख्या में सांप निकलने के बावजूद घर में रहने वाले किसी भी सदस्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। घटना के बाद ग्रामीण अपने घरों की साफ-सफाई और निगरानी में जुट गए हैं। अधिकारियों ने सलाह दी है कि आसपास साफ-सफाई रखें और रात के समय टॉर्च के साथ ही चलें।
बता दें कि यह मकान ग्रामीण शंभु प्रसाद का है। घर में शंभु प्रसाद, उनकी पत्नी, दो बेटे बंटी कुमार और धनंजय और 6 वर्षीय भांजा तरुण रहते हैं। बंटी पटना की एक निजी कंपनी में काम करते हैं और हर शाम ड्यूटी के बाद घर लौटते हैं। तीन दिन पहले की रात बंटी अपने कमरे में सो रहे थे। आधी रात को अचानक उनकी नजर बिस्तर के पास एक सांप पर पड़ी। घबराकर उन्होंने किसी तरह उसे कमरे से बाहर निकाला लेकिन कुछ ही देर बाद घर के दूसरे हिस्सों में भी 3-4 सांप रेंगते दिखे। इसके बाद पूरी रात परिवार दहशत में जागता रहा। किसी को नींद नहीं आई।
सुबह बढ़ी दहशत, सपेरे को बुलाया
अगले दिन सुबह ग्रामीणों को सूचना दी गई। मदद के लिए पहुंचे कुछ लोगों ने मिलकर 4-5 सांपों को मार दिया लेकिन डर था कि घर में अभी भी कई सांप छिपे हो सकते हैं। इसके बाद परिवार ने एक स्थानीय सपेरे को बुलाया। सपेरे ने घर की कोने-कोने में तलाशी ली। दीवारों की दरारें, अनाज रखने के बर्तन, पुराने कपड़े और खपरैल के नीचे से एक-एक कर सांप निकलते गए। करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद सपेरे ने तीन दर्जन से ज्यादा जहरीले सांप पकड़े। सभी सांपों को बड़े प्लास्टिक के जार और ढक्कन वाली बाल्टियों में बंद कर सपेरा उन्हें अपने साथ ले गया। सपेरे के अनुसार अधिकांश सांप करैत और नाग प्रजाति के थे, जो बेहद जहरीले माने जाते हैं।
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घटना से सहमे बंटी कुमार ने बताया, 'तीन दिन पहले रात में सो रहा था तभी पैर के पास कुछ सरसराहट हुई। टॉर्च जलाकर देखा तो सांप था। उसे भगाया ही था कि रसोई और दूसरे कमरे में भी सांप दिख गए। पूरी रात जागकर बितानी पड़ी। सुबह गांव वालों ने मदद की और फिर सपेरे को बुलाया। घर पुराना और मिट्टी का है। बरसात के कारण दीवारों में दरारें हो गई हैं। संभवतः उसी रास्ते से सांप घर में घुसे होंगे।'
इस घटना के बाद समकुड़ा गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने एक साथ इतनी बड़ी संख्या में सांप पहले कभी नहीं देखे। कई परिवार रात में जागकर पहरा दे रहे हैं। लोग घरों में तेजाब, फिनाइल और सांप भगाने वाले पाउडर का छिड़काव कर रहे हैं। बच्चों को अकेले बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। गांव के बुजुर्ग रामविलास यादव ने कहा, 'यह सोचकर ही रूह कांप जाती है कि जिस घर में बच्चे रहते हों वहां 40 से ज्यादा सांप निकलें। भगवान की कृपा रही कि कोई हादसा नहीं हुआ।' ग्रामीणों ने पंचायत से मांग की है कि गांव में एंटी वेनम और सांप पकड़ने वाले प्रशिक्षित लोगों की व्यवस्था की जाए।
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क्या कहते हैं वन विभाग के अधिकारी?
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बरसात के मौसम में सांप बिलों से निकलकर ऊंची और सुरक्षित जगहों की तलाश करते हैं। मिट्टी और खपरैल के पुराने घरों में दरारें होने के कारण सांप आसानी से घुस जाते हैं। घर के आसपास कचरा, ईंट-पत्थर और घास होने से भी सांपों को पनाह मिलती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि घर में साफ-सफाई रखें, अनाज को ढककर रखें और रात में टॉर्च के साथ ही चलें। फिलहाल शंभु प्रसाद के परिवार ने घर की मरम्मत शुरू कर दी है। दीवारों की दरारें बंद की जा रही हैं और फर्श पर सीमेंट का लेप लगाया जा रहा है। परिवार के लोग कुछ दिन के लिए पड़ोसी के घर में रह रहे हैं।