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UP में नौकरी का सपना दिखाकर 60 हजार युवाओं से 100 करोड़ की ठगी

यूपी के कानपुर जिले में पुलिस ने नौकरी के नाम पर 100 करोड़ की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य की तलाश की जा रही है।

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पकड़े गए आरोपी, Photo Credit: Kanpur Police

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उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी का फायदा उठाकर युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। कानपुर से संचालित फर्जी मल्टी लेवल मार्केटिंग (MLM) और पिरामिड चेन सिस्टम के जरिए देशभर के करीब 60 हजार युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर 80 से 100 करोड़ रुपये तक की ठगी की गई। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह के 100 से अधिक ट्रेनिंग सेंटर कई राज्यों में संचालित हो रहे थे। पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है और अब बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन तथा अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क की भी जांच शुरू हो गई है।

 

हनुमंत विहार थाना पुलिस, क्राइम ब्रांच और दक्षिण जोन की साइबर टीम की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह का पर्दाफाश हुआ। पुलिस के अनुसार, केवल कानपुर में ही करीब दो हजार युवाओं को ठगा गया, जबकि देशभर में 60 हजार से अधिक लोग इस नेटवर्क के शिकार बने। झारखंड, बिहार और मध्य प्रदेश के सबसे अधिक युवाओं को निशाना बनाया गया।


पुलिस आयुक्त ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया है। एडीजीपी दक्षिण सुमित शुक्ला इसकी निगरानी करेंगे। जांच एजेंसियां अब गिरोह के बैंक खातों, संपत्तियों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क की जांच कर रही हैं।

 

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छह आरोपी गिरफ्तार, कई राज्यों तक जुड़े तार

गिरफ्तार आरोपियों में रविंद्र यादव (बेगूसराय), कमलेश कुमार (पटना), रोहित शाह (कोलकाता), मंगल शाक्य (दतिया), राजू कुमार (भोजपुर) और मंतोष पासवान (शाहपुर, भोजपुर) शामिल हैं। इनके कब्जे से छह मोबाइल फोन, कॉर्पोरेट दस्तावेज, चैट, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।जांच में पता चला है कि गिरोह देशभर में 100 से अधिक ट्रेनिंग सेंटर चला रहा था। इनमें पांच सेंटर उत्तर प्रदेश में थे, जबकि प्रमुख केंद्र नोएडा और दिल्ली में संचालित किए जा रहे थे। यहीं से युवाओं को ट्रेनिंग और नेटवर्क बढ़ाने की रणनीति तैयार की जाती थी।

 

आरोपी विन मेकर आयुर्वेदा प्राइवेट लिमिटेड और धनवंतरी आयुर्वेदा के नाम पर फ्रेंचाइजी चलाते थे। युवाओं को 25 से 30 हजार रुपये मासिक वेतन वाली नौकरी का लालच दिया जाता था। कॉर्पोरेट कार्यालय जैसा माहौल बनाकर इंटरव्यू लिया जाता और फिर रजिस्ट्रेशन व प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 15 से 30 हजार रुपये तक जमा करा लिए जाते थे। रुपये लेने के बाद युवाओं को एक से दो हजार रुपये कीमत की किट थमा दी जाती थी, जिसमें साबुन, तेल, कपड़े और अन्य उत्पाद होते थे। इसके बाद उन्हें कम से कम दो नए सदस्य जोड़ने का लक्ष्य दिया जाता था। कहा जाता था कि जितने अधिक सदस्य जोड़ेंगे, उतना अधिक कमीशन मिलेगा और वेतन भी बढ़ेगा।

 

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लक्ष्य पूरा नहीं तो वेतन और रिफंड दोनों बंद

जो युवक नए सदस्य नहीं जोड़ पाते थे, उन्हें रिफंड न देने और वेतन रोकने की धमकी दी जाती थी। वहीं, जो लोग चेन बनाकर सदस्य जोड़ते भी थे, उन्हें महीने में केवल पांच से छह हजार रुपये ही दिए जाते थे। इस तरह गिरोह लगातार नए लोगों को जोड़कर करोड़ों रुपये की उगाही करता रहा।

 

पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में 80 से 100 करोड़ रुपये की ठगी का अनुमान है लेकिन एसआईटी को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर यह रकम और बढ़ सकती है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही है। आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

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