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मुंबई लोकल में सीट को लेकर पथराव, यात्री ने आंख गंवा दी

मुंबई लोकल में एक सीट को लेकर दो लोगों में विवाद हो गया। विवाद के बाद एक शख्स ने दूसरे पर पथराव किया। शख्स ने आंख गंवा दी है।

मुंबई लोकल में सीट विवाद

प्रतीकात्मक तस्वीर Photo Credit ChatGpt

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मुंबई के बांद्रा में एक लोकल ट्रेन में एक यात्री और दूसरे यात्री के बीच हुई कहासुनी के बाद एक राहगीर पर दूसरे यात्री द्वारा पत्थर फेंक दिया। इस झड़प में एक व्यक्ति की आंख में गंभीर चोट लगी, जिसमें उसने अपनी आंख गंवा दी है। रेलवे पुलिस ने गुरुवार को संदिग्ध का पता लगाकर, उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी योगेंद्र बौद्ध एक मजदूर है। आरोपी शख्स के पत्थर फेंकने की वजह से कथित तौर पर 28 वर्षीय निशांत खत्री घायल गए। दो दिन पहले ही उनकी सगाई हुई थी। 

3 फरवरी को निशांत खत्री ने दफ्तर का काम खत्म किया और घर जाने के लिए अंधेरी स्टेशन से चर्चगेट जाने वाली लोकल ट्रेन पकड़ी। फाइनेंस में एमबीए कर चुके निशांत खत्री साकीनाका की एक कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। ट्रेन के डिब्बे में दो यात्री सीटों को लेकर झगड़ रहे थे। जब ट्रेन बांद्रा पहुंची तो उनमें से एक शख्स पटरियों पर कूद गया और एक पत्थर उठा लिया।

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सीट विवाद से हुई हिंसा की शुरुआत

निशांत खत्री ने बताया, 'मैं तीसरी सीट पर बैठा था। पहला पत्थर मेरे पीछे से आया और ट्रेन से टकराया। किसी को चोट नहीं लगी, लेकिन एक जोरदार आवाज हुई और सब लोग दहशत में आ गए।' डिब्बे में अफरा-तफरी मचते ही निशांत खत्री ने यह पता लगाने के लिए बाईं ओर देखा कि क्या हो रहा है। तभी एक दूसरा पत्थर आकर उन्हें लग गया। 

खत्री ने बताया, 'मेरी बाईं आंख पर चोट लगी और खून बहने लगा।' सहयात्रियों ने उन्हें घायल होते देखा, लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं बढ़ा। उन्होंने बताया, 'उन्होंने अलार्म चेन भी नहीं खींची। ट्रेन चलने के बाद मैं किसी तरह उससे उतर पाया।' निशांत खत्री को एक होम गार्ड मिला, जो उन्हें पूरे प्लेटफॉर्म तक ले गया। इसके बाद उन्हें स्टेशन मैनेजर के कार्यालय ले जाया गया। 

 

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इलाज में देरी के आरोप

खत्री ने आरोप लगाया है कि औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए उन्हें 45 मिनट तक इंतजार कराया गया। पश्चिमी रेलवे के अधिकारियों ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि मामला उनके संज्ञान में आने के 15 मिनट बाद, रात 11:25 बजे उन्हें भाभा अस्पताल ले जाया गया। खत्री ने बताया, 'भाभा अस्पताल में डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे और एक वार्ड बॉय ने मुझे टिटनेस का इंजेक्शन लगाने से पहले मेरे घाव को साफ किया। मेरे रिश्तेदारों ने मुझे हिंदुजा अस्पताल पहुंचाया जहां मेरी सर्जरी हुई।'

बांद्रा जीआरपी ने एफआईआर दर्ज कर संदिग्ध की तलाश के लिए एक टीम गठित की। डीसीपी सुनीता सालुंके, एसीपी किशोर शिंदे और वरिष्ठ निरीक्षक शाहजी निकम के नेतृत्व में टीम ने पश्चिमी रेलवे के विभिन्न रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर संदिग्ध दादर पहुंचने वाला है, पुलिस टीम ने जाल बिछाकर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

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पीड़ित परिवार पर पड़ा गहरा असर

बौद्ध उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और आठ महीने पहले मुंबई आए थे। वे वसई में रहते हैं और एक प्लास्टिक कंपनी में काम करते हैं। पुलिस ने बताया कि वे अक्सर मनोरंजन के लिए वसई और चर्चगेट के बीच चलने वाली लोकल ट्रेनों में सफर करते हैं। खत्री के रिश्तेदारों ने बताया कि वह परिवार के इकलौते कमाने वाले थे और एक आंख की रोशनी चले जाने से उनकी काम करने की क्षमता प्रभावित होगी। उन्होंने कहा, 'इस घटना में मेरी आंख की पुतली क्षतिग्रस्त हो गई और डॉक्टरों ने कहा है कि मेरी बाईं आंख की रोशनी कभी वापस नहीं आएगी। मेरी कोई गलती नहीं थी, फिर भी मेरा जीवन बर्बाद हो गया है।'


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