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डिजिटल अरेस्ट में गंवाए 1.64 करोड़, असली पुलिस आई तो उसे नकली समझ लिया

मुंबई में एक बुजुर्ग शख्स से फर्जी पुलिस बनकर ठगों ने 1.64 करोड़ रुपये ठग लिए। जब असली पुलिस व्यक्ति को बचाने गई तो बुजुर्ग ने असली पुलिस को ही नकली पुलिस समझ लिया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Gemini

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महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में पुलिस के सामने एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां साइबर क्राइम पुलिस को पता चला है कि कुछ आरोपियों ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए 1.64 करोड़ रुपये ठग लिए थे। जब पुलिस को इस धोखाधड़ी के बारे में पता चला तो वह पीड़ित को बचाने उनके घर गई। पीड़ित शख्स ने असली पुलिस को नकली पुलिस समझ लिया और उन्हें घर में घुसने नहीं दिया। मुंबई पुलिस धोखाधड़ी करने वाले आरोपियों की तलाश में जुटी है।

 

साइबर पुलिस के मुताबिक, मुंबई के ग्रांट रोड के पास रहने वाले 75 साल के एक बुजुर्ग व्यक्ति को आरोपियों ने अपना शिकार बनाया। आरोपियों ने फर्जी पुलिस बनकर उन्हें व्हाट्सएप कॉल किया। इसके बाद डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अलग-अलग खातों में कुल 1.64 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए।

 

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कैसे पता चला फर्जीवाड़ा?

मुंबई साइबर पुलिस की एक टीम को पता चला कि पिछले कुछ महीनों से एक व्यक्ति उन खातों में रुपये ट्रांसफर कर रहा था, जो पहले से फ्रीज हो चुके थे। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने जांच-पड़ताल की। जांच में पता चला कि डिजिटल अरेस्ट के जरिए बुजुर्ग से 1.64 करोड़ रुपये ठगे गए थे। पुलिस के मुताबिक, बुजुर्ग ने 8 जून से 25 जुलाई तक कई खातों में रुपये ट्रांसफर किए थे।


पुलिस की जांच में पता चला कि दो आरोपियों ने खुद को पुणे एटीएस का अधिकारी बताकर बुजुर्ग से धोखाधड़ी की थी। उन्होंने अपना नाम श्रीकांत कुमार और अशोक कुमार बताया था। इसके बाद आरोपियों ने बुजुर्ग को फर्जी पहचान पत्र दिखाए, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि वे असली पुलिस अधिकारी हैं। दोनों आरोपियों ने फर्जी पहचान के आधार पर बुजुर्ग को ब्लैकमेल किया।

 

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असली पुलिस को समझा नकली

पुलिस को जैसे ही इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली, वैसे ही तीन पुलिसकर्मी बुजुर्ग के घर पहुंचे ताकि उन्हें धोखाधड़ी के बारे में बता सकें। बुजुर्ग ने असली पुलिस अधिकारियों को ही नकली समझ लिया और उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया। पुलिस ने कई बार उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं माने और घर का दरवाजा भी नहीं खोला।


इसके बाद पुलिस सिविल ड्रेस में एक अन्य पीड़ित व्यक्ति के साथ बुजुर्ग के घर पहुंची। उस पीड़ित ने उन्हें पूरी सच्चाई बताई, तब जाकर बुजुर्ग को यकीन हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले की आगे की जांच शुरू कर दी, ताकि जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सके।


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