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फर्जी सील और पैड से चलाता था VVIP रेलवे टिकट रैकेट, मास्टरमाइंड समेत 7 गिरफ्तार

ऐसे रैकेट का पर्दाफाश हुआ है जो करीब दो साल से VVIP कोटे से कन्फर्म रेलवे टिकट बनाने के लिए नकली लेटरहेड, सील और सिग्नेचर का इस्तेमाल करता था। पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

representative image of police action

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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करीब दो साल तक फर्जी सिफारिशी लेटर के जरिए VVIP कोटे से कन्फर्म रेलवे टिकट दिलाने का बड़ा रैकेट चल रहा था। आरोप है कि महाराष्ट्र के मुंबई के घाटकोपर में रहने वाले अमरीश ठक्कर ने रेलवे अधिकारियों, नेताओं और यहां तक कि राज्यपाल कार्यालय के नाम पर नकली लेटरहेड, फर्जी हस्ताक्षर और सील तैयार करवाईं। इन्हीं के जरिए उसने सैकड़ों लोगों के लिए कन्फर्म टिकट बुक कराए। इस मामले में पुलिस ने इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है और अब पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

 

पुलिस के अनुसार, कोविड महामारी के दौरान कपड़ों का कारोबार बंद होने के बाद अमरीश ने टिकट का काम शुरू किया था। शुरुआत में वह असली सिफारिशी लेटरों के जरिए VVIP कोटे से टिकट दिलाता था और प्रति टिकट करीब 200 रुपये कमीशन लेता था। बाद में जब अधिकारियों ने ऐसे अनुरोध स्वीकार करना कम कर दिया तो उसने फर्जी दस्तावेज तैयार कर टिकट हासिल करने का रास्ता अपना लिया।

 

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टिकट रैकेट का पर्दाफाश कैसे हुआ?

जनवरी 2026 में गृह मंत्रालय के निर्देश पर राजभवन का नाम बदलकर लोकभवन कर दिया गया था। अमरीश पुराने राजभवन वाले लेटरहेड पर ही फर्जी सिफारिशी लेटर तैयार करता रहा। फरवरा में LTT राजगीर एक्सप्रेस और छपरा एक्सप्रेस के लिए भेजे गए दो संदिग्ध लेटरों की जांच लोकभवन में हुई। राज्यपाल के DCA ने लेटरहेड, हास्ताक्षर और मुहर को फर्जी बताया, जिसके बाद मालाबार हिल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और जांच शुरू हुई।

 

पुलिस से बचने के लिए अमरीश ने विमल नाम से एक गुमनाम सूचना देकर जांच का रुख अपने ही भाई सागर ठक्कर की तरफ मोड़ने की कोशिश की। पुलिस ने सागर को पकड़ लिया लेकिन पूछताछ के दौरान उसके मोबाइल में दोनों भाइयों की एक साथ तस्वीर मिल गई। सह-आरोपी विनय रावत ने फोटो में दिख रहे शख्स की पहचान अमरीश ठक्कर के रूप में कर दी। इसके बाद पुलिस ने 28 जुलाई को अमरीश को भी गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह भी पता चला कि इससे पहले भी वह एक दूसरे मामले में अपने साथी का नाम आगे करके खुद पुलिस की पकड़ से बचने की कोशिस कर चुका था।

 

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200 एजेंटों का था नेटवर्क

जांच में खुलासा हुआ कि अमरीश ने मुंबई, गुजरात और उत्तर प्रदेश में 200 से अधिक एजेंटों का नेटवर्क खड़ा कर रखा था, जो टेलीग्राम और फर्जी मोबाइल नंबरों के जरिए काम करते थे। पुलिस को 500 से ज्यादा यात्रियों का डेटा, 12 मोबाइल फोन, 16 सिम कार्ड और 70 डेबिट-क्रेडिट कार्ड मिले हैं। फोर्ट इलाके की एक स्टेशनरी दुकान के कर्मचारी आकाश पर फर्जी लेटरहेड बनाने का आरोप है, जबकि नकली मुहर तैयार करने वाले एक अन्य दुकानदार को नोटिस भेजा गया है। इस मामले में अमरीश ठक्कर, उसके भाई सागर समेत कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में कोई रेलवे अधिकारी या अन्य एजंट भी शामिल थे  या नहीं।


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