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परिवार ने नहीं ली लाश, मुस्लिम महिला ने हिंदू व्यक्ति का किया अंतिम संस्कार

केरल में एक शख्स की लाश को उसके परिवार ने लेने से मना कर दिया। इसके बाद एक मुस्लिम महिला जिला पंचायत सदस्य ने उनका हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया।

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हिंदू शख्स का मुस्लिम महिला ने किया अंतिम संस्कार। (Photo Credit: Social Media)

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केरल में धार्मिक सद्भभावना की एक शानदार मिसाल देखने को मिली। यहां एक हिंदू व्यक्ति का अंतिम संस्कार मुस्लिम महिला पंचायत सदस्य ने किया। बताया जा रहा है कि गुरुवार को व्यक्ति की मौत हो गई थी। परिजनों को सूचना दी गई, लेकिन उन्होंने शव लेने मना कर दिया। इसके बाद मुस्लिम महिला पंचायत सदस्य ने हिंदू धर्म की रीति-रिवाज के मुताबिक व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया। सोशल मीडिया पर महिला के इस कदम की खूब तारीफ हो रही है।

 

मामला केरल के कासरगोड जिला का है। जिला पंचायत की विकास अध्यक्ष इरफाना इकबाल के मुताबिक एक महीने पहले एक दुकान के बरामदे में 64 वर्षीय नारायणन बेहद कमजोर स्थिति में पड़े मिले। वार्ड के सदस्य ने मामले की जानकारी दी। इसेक बाद जिलाधिकारी और जिला चिकित्सा अधिकारी को भी इससे अवगत कराया गया।

 

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एक धर्मार्थ संस्था के स्वयंसेवकों की मदद से नारायणन को प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद उन्हें कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। नारायणन को चौथे चरण का कैंसर था। उनकी हालात बेहद गंभीर थी। गुरुवार को नारायणन ने आखिरी सांस ली। वे मणेश्वरम के चिगरुपदावु के रहने वाले थे।

परिवार ने शव लेने से किया मना

इरफाना इकबाल ने बताया कि नारायणन की मौत के बाद पुलिस ने उनके परिजन को इसकी जानकारी दी, लेकिन उन्होंने शव लेने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने इरफाना इकबाल को शव स्वीकार करने और अंतिम संस्कार करने की अनुमति दे दी।

मैंने बेटी की तरह अंतिम संस्कार किया: इरफाना

इरफाना इकबाल ने कहा, 'हमने धार्मिक रीति-रिवाजों के मुताबिक हिंदू श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया। इरफाना इकबाल ने स्वयं उप्पाला के एक श्मशान घाट में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न कराई। बुर्का पहन कर अंतिम संस्कार करते उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

 

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इरफाना इकबाल ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, 'कोई करीबी रिश्तेदार नहीं आया। मैंने नारायणन का अंतिम संस्कार एक बेटी की तरह किया। मानवता धर्म और राजनीति से ऊपर है।' उन्होंने यह भी कहा कि वह आगे भी ऐसे बेसहारा बुजुर्गों की मदद करती रहेंगी। उन्होंने बताया कि उनके समुदाय में इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि धर्मार्थ संस्था में रहने वाले अनाथ लोगों का अंतिम संस्कार उनके-अपने धर्मों के अनुसार किया जाता है। 

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