logo

मूड

ट्रेंडिंग:

क्या नीतीश की शराबबंदी बनी सम्राट चौधरी का सिरदर्द? बिहार सह रहा राजस्व नुकसान

बिहार में शराबबंदी पर NCAER की नई रिपोर्ट ने नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े और राज्य को राजस्व नुकसान हुआ।

NCAER study on effect on Bihar after liquor ban in state

शराब की बोतलें, Photo Credit: PTI

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

बिहार में शराबबंदी को लेकर आई एक नई रिसर्च ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आर्थिक शोध संस्थान नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शराबबंदी अपने मकसद को हासिल करने में सफल नहीं रही। रिपोर्ट के मुताबकि, 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी नहीं आई बल्कि ऐसे मामलों में बढ़रोतरी हुई। इसके अलावा, शराबबंदी से राज्य को इकोनॉमिक रेवेन्यू का नुकसान भी हुआ।

 

इसे रिपोर्ट को इंडिया पॉलिसी फोरम में पेश किया गया। रिपोर्ट में शराबबंदी से बिहार की अर्थव्यवस्था पर पड़े असर के साथ-साथ राज्य के विकास से जुड़े कई दूसरे अहम मुद्दों पर भी चर्चा की गई है।

 

यह भी पढ़ें: चंडीगढ़: SBI ने आयोजित की PM विश्वकर्मा प्रदर्शनी, कारीगरों को मिल रहा मंच

शराबबंदी के बावजूद महिलाओं के खिलाफ बढ़े अपराध

रिपोर्ट के मुताबकि, अप्रैल 2016 में शराबबंदी लागू करने के पीछे मुख्य वजह घरेलू हिंसा को कम करना और परिवारों की आय को बेहतर इस्तेमाल के लिए बचाना था। महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस कदम का समर्थन किया था। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि शराबबंदी के बाद महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों में व्यापक कमी नहीं आई। 2016 के बाद ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है।

 

NCAER ने कहा है कि शराबबंदी के बाद अवैध शराब के कारोबार ने भी पैर पसारे। तस्करी रोकने के लिए गिगरानी और कार्रवाई पर सरकार का खर्च बढ़ा। रिपोर्ट में अवैध शराब के साथ दूसरे नशीले पदार्थों के इस्तेमाल में बढ़ोतरी की बात भी कही गई है। इसके चलते अपराध और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं को लेकर भी चिंता जताई गई है।

 

यह भी पढ़ें: 3 हजार करोड़ खर्च, फिर भी मैली है गोमती नदी, आखिर कब रुकेगा नालों का गंदा पानी?

राजस्व में 14-15% बढ़ोतरी का दावा

रिपोर्ट में शराबबंदी के आर्थिक असर को भी रेखांकित किया गया है। इसके मुताबिक, शराबबंदी से पहले तीन वर्षों में शराब से मिलने वाला एक्साइज टैक्स बिहार सरकार के अपने राजस्व का करीब 14 फीसदी था। प्रतिबंध के बाद यह बड़ा राजस्व स्रोत खत्म हो गया, जबकि शराब तस्करी रोकने पर खर्च बढ़ गया।

 

NCAER ने सुझाव दिया है कि बिहार में शराब पर पहले की तरह एक्साइज ड्यूटी बहाल करने पर विचार किया जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, इससे राज्य के अपने राजस्व में करीब 14-15 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट ने बिहार के विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था, बाढ़ प्रबंधन, निजी क्षेत्र के विकास और महिला सशक्तीकरण को छह प्रमुख प्राथमिकताएं बताया है।


और पढ़ें