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नेपाल में भारी बारिश से गंडक उफान पर, शाम तक 5 लाख क्यूसेक पहुंचने की आशंका

नेपाल की भारी बारिश से बिहार की गंडक नदी का जलस्तर बढ़ गया है। वाल्मीकिनगर बराज पर पानी का बहाव बढ़ने से अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

gandak river water level high

गंडक नदी में बढ़ा पानी, Photo Credit- Social Media

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नेपाल में पिछले 24 घंटों में हुई भारी बारिश के कारण बिहार की गंडक नदी में पानी तेजी से बढ़ रहा है। गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई है जिससे वाल्मीकिनगर बराज पर पानी का बहाव लगातार बढ़ रहा है। 27 सितंबर को सुबह 11 बजे वाल्मीकिनगर बराज पर 4,24,000 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया और अभी इसके और बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है और सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

 

उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि नेपाल में गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश हो रही है जिसका असर बिहार की नदियों पर पड़ रहा है। गंडक नदी नेपाल से निकलकर बिहार में आती है इसलिए नेपाल में बारिश होने पर बिहार में भी बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।

 

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2024 से कम रहेगा गंडक का जलस्तर

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि वाल्मीकिनगर बराज से करीब 80 किलोमीटर ऊपर नेपाल के देवघाट गेज स्थल पर दर्ज अभी के जलस्तर के अनुसार वाल्मीकिनगर बराज पर शाम तक करीब 5 लाख क्यूसेक या उससे अधिक पानी आने की संभावना है। देवघाट में अभी पानी तेजी से बढ़ रहा है जो 6 से 8 घंटे में वाल्मीकिनगर बराज तक पहुंच सकता है। इसलिए विभाग ने पहले से ही तैयारी कर ली है।

 

विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यह पानी वर्ष 2024 में दर्ज किए गए अधिकतम 5,62,500 क्यूसेक जलश्राव की तुलना में कम रहने की संभावना है। इसके बावजूद विभाग लगातार निगरानी और चौकसी कर रहा है। 2024 में गंडक में रिकॉर्ड पानी आया था जिससे कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बन गई थी। इस बार पानी उससे कम रहने की उम्मीद है लेकिन फिर भी किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है।

 

तटबंधों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। डिप्टी सीएम ने बताया कि तटबंधों की बेहतर निगरानी के लिए गंडक नदी के दोनों तटबंधों पर अतिरिक्त इंजीनियरों की प्रतिनियुक्ति की गई है। तटबंधों पर कहीं भी रिसाव, कटाव या कमजोरी दिखती है तो तुरंत मरम्मत की जाएगी। सभी इंजीनियरों को 24 घंटे अलर्ट मोड में रहते हुए लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। रात में भी टॉर्च और लाइट लगाकर तटबंधों की निगरानी की जाएगी।

लापरवाही पर होगी कार्रवाई

डिप्टी सीएम ने इंजीनियरों को सख्त निर्देश देते हुए कहा, 'इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कड़ी कार्रवाई होगी। यदि कोई इंजीनियर या अधिकारी लापरवाही बरतता है, ड्यूटी पर नहीं रहता है या समय पर सूचना नहीं देता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। तटबंधों की सुरक्षा से लाखों लोगों की जान जुड़ी है इसलिए इसमें कोई समझौता नहीं होगा।' फिलहाल गंगा नदी का जलस्तर कम रहने के कारण गंडक नदी के पानी की निकासी गंगा में ठीक से होने की स्थिति बनी हुई है। इससे बड़े स्तर पर जलजमाव या गंभीर बाढ़ का खतरा नहीं होने की संभावना है। 

 

गंडक नदी सोनपुर के पास गंगा में मिलती है। यदि गंगा में पानी ज्यादा रहता है तो गंडक का पानी नहीं निकल पाता और पीछे के जिलों में बाढ़ की स्थिति बन सकती है लेकिन इस बार गंगा का जलस्तर कम है इसलिए गंडक का पानी आसानी से गंगा में निकल जाएगा। इससे गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में बाढ़ का बड़ा खतरा नहीं होने की संभावना है। हालांकि डिप्टी ने कहा कि मौसम और प्रकृति की स्थिति का पूरी तरह अनुमान लगाना मुश्किल है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। नेपाल में अगर और ज्यादा बारिश होती है तो पानी और बढ़ सकता है, इसलिए विभाग पूरी तरह तैयार है। सभी जिलों के डीएम और एसपी को भी अलर्ट कर दिया गया है।

 

डिप्टी सीएम ने लोगों से अपील करते हुए कहा, 'बिल्कुल घबराएं नहीं केवल सतर्क और सजग रहने की जरूरत है। अफवाहों पर ध्यान न दें। जल संसाधन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है। तटबंधों के अंदर रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है लेकिन कहीं भी घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।'

 

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गंडक को लेकर पहले से तैयारी

मालूम हो कि गंडक नदी में हर साल नेपाल में भारी बारिश के कारण पानी बढ़ता है। गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण और मुजफ्फरपुर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इस बार भी विभाग ने पहले से तैयारी कर ली है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष को सक्रिय कर दिया गया है और हर घंटे पानी के बहाव की जानकारी ली जा रही है। तटबंधों पर बांस, बालू की बोरी, बोल्डर और अन्य सामग्री पहले से पहुंचा दी गई है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मरम्मत की जा सके।

 

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वाल्मीकिनगर बराज पर 5 लाख क्यूसेक तक पानी आना सामान्य बाढ़ की स्थिति में माना जाता है। इससे तटबंधों को कोई खतरा नहीं है। तटबंध 7 लाख क्यूसेक तक पानी झेलने में सक्षम हैं। फिर भी एहतियात के तौर पर सभी इंतजाम किए गए हैं। लोगों से कहा गया है कि वे तटबंधों पर मवेशी न बांधें और अनावश्यक भीड़ न लगाएं।


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