उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग क्षेत्र में निहंगों द्वारा दो गुरुद्वारों पर जबरन कब्जे की कोशिश की गई है, जहां उन्होंने तोड़फोड़ की और एक 65 साल के बुजुर्ग को बंधक बना लिया। यह पूरा विवाद 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई तलवारबाजी की घटना के बाद शुरू हुआ, जहां पुलिस ने चार निहंगों को गिरफ्तार किया था। इसी बात से नाराज होकर निहंगों ने नगरासू और रुद्रप्रयाग के गुरुद्वारों में घुसकर गाली-गलौज की और छत से नीचे पत्थर फेंके। माहौल को शांत करने के लिए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया है और सुरक्षा के लिए 27 जून तक धारा 163 लागू कर दी है।
यह पूरा मामला 16 जून को मंगलवार के दिन कर्णप्रयाग में शुरू हुआ था। वहां निहंग यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई थी। बात इतनी बढ़ गई कि निहंगों ने तलवारें निकाल लीं और तलवारबाजी की। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और चार निहंगों के खिलाफ केस दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी से सिख समुदाय के कुछ लोग नाराज हो गए और सोशल मीडिया पर उनका गुस्सा दिखने लगा। उनका कहना था कि पुलिस ने सिर्फ निहंगों को पकड़ा और दूसरे पक्ष यानी स्थानीय लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसी नाराजगी के कारण सिख समुदाय ने रविवार को कर्णप्रयाग में एक बड़े धरने और प्रदर्शन का ऐलान किया था।
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क्या हंगामा हुआ?
शनिवार को कुछ निहंग अचानक गढ़वाल के नगरासू इलाके में स्थित गुरुद्वारे में पहुंच गए। गुरुद्वारे के प्रबंधक बेहंत सिंह ने बताया कि इन लोगों ने आते ही गाली-गलौज शुरू कर दी और सेवादारों के साथ मारपीट की। वे जबरन गुरुद्वारे के अंदर घुस गए और तोड़फोड़ करने लगे। इसके बाद करीब 7 से 8 निहंग गुरुद्वारे की सबसे ऊपरी मंजिल यानी छत पर चढ़ गए और वहां डट गए। इन निहंगों ने छत पर पहले से ही बहुत सारे पत्थर और दूसरा सामान जमा कर रखा था। उन्होंने छत से नीचे पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इस पत्थरबाजी से गुरुद्वारे की संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचा और वहां आए श्रद्धालुओं और यात्रियों में डर फैल गया।
पुलिस की कोशिश
छत पर कब्जा जमाकर बैठे निहंगों की मांग थी कि पुलिस उनके गिरफ्तार साथियों को तुरंत बिना किसी शर्त के रिहा करे। अपनी बात मनवाने के लिए उन्होंने दो लोगों को बंदी बना लिया। इन बंधकों में एक 65 साल के बुजुर्ग व्यक्ति भी शामिल थे। बाद में निहंगों ने एक व्यक्ति को तो छोड़ दिया लेकिन दूसरे बुजुर्ग व्यक्ति को बिना किसी बल प्रयोग के सुरक्षित बाहर निकालना और हालात को सामान्य करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस और आईटीबीपी के जवानों ने पूरे गुरुद्वारे को चारों तरफ से घेर लिया और पूरा इलाका छावनी बन गया। पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने खुद फोन पर करीब एक घंटे तक निहंगों से बात की और उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन कोई हल नहीं निकल सका और निहंग अपनी जिद पर अड़े रहे।
नगरासू जैसी ही घटना रुद्रप्रयाग के एक दूसरे गुरुद्वारे में भी हुई। वहां भी कुछ निहंग जबरन गुरुद्वारे के अंदर घुस गए। उन्होंने वहां काम करने वाले सेवादारों के साथ मारपीट की और गालियां दीं। वे गुरुद्वारे की पूरी व्यवस्था को अपने हाथ में लेना चाहते थे और जबरन उस पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। इन दोनों घटनाओं की वजह से पूरे यात्रा मार्ग पर बहुत ज्यादा तनाव का माहौल बन गया।
इंटरनेट बंद
माहौल को बिगड़ने से रोकने और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने नगरासू इलाके में शनिवार शाम को ही इंटरनेट सेवा बंद कर दी। यह इंटरनेट करीब 12 घंटे तक बंद रहा और रविवार शाम को करीब 5 बजकर 20 मिनट पर दोबारा शुरू किया गया। दूसरी तरफ, कर्णप्रयाग में सिख समुदाय के प्रदर्शन के ऐलान को देखते हुए रविवार को पूरे दिन कर्णप्रयाग, गौचर और सिमली जैसे कई संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद रखी गईं। हालांकि, इस भारी हंगामे और तनाव के बीच भी एक अच्छी बात यह रही कि बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब की पवित्र यात्रा बिना किसी रुकावट के पूरे दिन लगातार चलती रही।
सुरक्षा के लिए 27 जून तक नए नियम
कर्णप्रयाग के एसडीएम अलकेश नौडियाल ने कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए पूरे इलाके में 27 जून तक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत कड़े नियम बनाए गए हैं कि किसी भी जगह पर 5 या उससे ज्यादा लोग एक साथ इकट्ठा नहीं हो सकते और न ही कोई धरना-प्रदर्शन कर सकते हैं।
इसके साथ ही इलाके में किसी भी तरह का जुलूस, झांकी, जनसभा या रैली करने की इजाजत नहीं होगी और किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम या जगह पर लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। ड्यूटी पर तैनात पुलिसवालों और कर्मचारियों को छोड़कर कोई भी व्यक्ति अपने साथ लाठी, डंडा, चाकू, तलवार, भाला, बंदूक, पिस्टल या कोई भी हथियार लेकर नहीं घूम सकता है। इसके अलावा तेजाब, पेट्रोल, डीजल जैसी चीजें और आतिशबाजी के पटाखे ले जाने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
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इस पूरे मामले और उत्तराखंड में बने सुरक्षा संकट को देखते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात की। दोनों मुख्यमंत्रियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने, सुरक्षा इंतजामों को पुख्ता करने और पूरे मामले को आपसी तालमेल से सुलझाने पर चर्चा की।