बिहार के वैशाली जिले के महुआ में पुलिस पदाधिकारी सब डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) संजीव कुमार की लापरवाही की पोल खुल गई है। तिरहुत रेंज के डीआईजी चंदन कुशवाहा ने संजीव कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा पुलिस मुख्यालय को भेज दी है। डीआईजी ने यह अनुशंसा वैशाली एसपी की रिपोर्ट के आधार पर भेजी है। रिपोर्ट में एसडीपीओ पर लंबित मामलों का निपटारा न करने, नक्सली मामलों की समीक्षा न करने, शराब माफिया पर कार्रवाई न करने और विभागीय बैठकों से गायब रहने के आरोप लगे हैं।
कुछ दिन पहले डीआईजी चंदन कुशवाहा रेंज के सभी एसडीपीओ के कार्यों और एनडीपीएस एक्ट के लंबित मामलों की समीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान महुआ एसडीपीओ के काम में भारी लापरवाही सामने आई। वैशाली एसपी ने उनसे 13 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। रिपोर्ट देखकर अधिकारी भी चौंक गए। संजीव कुमार के योगदान के समय महुआ में कुल 2249 केस लंबित थे। फरवरी 2026 के अंत तक 7 महीने बीत जाने के बाद भी 2146 केस लंबित ही रहे। यानी इस पूरे कार्यकाल में उन्होंने सिर्फ 17 केसों का ही निपटारा कराया। एक महीने में औसतन 2 से 3 केस भी नहीं निपटे।
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नक्सली केस डायरी तक नहीं देखी
जांच-पड़ताल में चौंकाने वाला मामला सामने आया। महुआ के SDPO संजीव कुमार को पहले से 5 केसों के निपटारे का काम सौंपा गया था, जबकि 7 महीने में उन्होंने एक भी केस डायरी सबमिट नहीं की। सबसे चौंकाने वाली बात नक्सली मामलों को लेकर है। उनके क्षेत्र में 2012 से 2018 के बीच की नक्सली घटनाओं से जुड़े 4 मामले अभी भी लंबित हैं। नियम के अनुसार हर महीने इनकी समीक्षा होनी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया कि संजीव कुमार ने 7 महीने में एक बार भी इन मामलों की समीक्षा नहीं की। नक्सल प्रभावित इलाके में इस तरह की लापरवाही को बेहद गंभीर माना जा रहा है।
साथ ही संजीव कुमार पर आरोप है कि उन्होंने शराबबंदी कानून की सफलता के लिए महुआ में कोई प्रयास नहीं किया। सबसे बड़ा आरोप शराब माफिया प्रभात सिंह को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार प्रभात सिंह कई मामलों में वांछित है। वह घर पर रहकर जंदाहा थाना क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार कर रहा था। स्थानीय पुलिस और जंदाहा थानाध्यक्ष के संरक्षण में यह कारोबार चल रहा था लेकिन एसडीपीओ ने उसकी गिरफ्तारी के लिए कोई पहल नहीं की। न छापेमारी हुई, न कोई कार्रवाई। एसपी की रिपोर्ट में इसे सीधे तौर पर लापरवाही और मिलीभगत माना गया है।
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बैठकों से गायब, डायरी और पंजी की हालत खराब
वैशाली एसपी की रिपोर्ट में कहा गया कि साल 2025-26 में महुआ के SDPO संजीव कुमार ने सिर्फ 3 प्रतिष्ठानों की निरीक्षण टिप्पणी भेजी। जुलाई 2025 से जनवरी 2026 तक उन्होंने एक भी विभागीय जांच पूरी नहीं की। संजीव कुमार के क्षेत्र में वारंट, इश्तेहार और कुर्की पंजी की स्थिति बेहद खराब पाई गई। कई मामलों में 15 दिन की देरी से पर्यवेक्षण टिप्पणी भेजी गई। जो टिप्पणी भेजी भी गई, वह त्रुटिपूर्ण थी। एसपी ने रिपोर्ट में साफ लिखा है कि संजीव कुमार का अपने अधीनस्थों पर कोई नियंत्रण नहीं है। इसी कारण अपराध नियंत्रण और सरकारी नीतियों का पालन कराना मुश्किल हो गया है।
डीआईजी चंदन कुमार कुशवाहा ने एसपी की रिपोर्ट को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि संजीव कुमार से यह उम्मीद की जाती है कि वह लंबित मामलों का निष्पादन करे, कानून-व्यवस्था बनाए और सरकार की नीतियों को लागू कराए। महुआ में स्थिति बिल्कुल उलट रही। डीआईजी ने कर्तव्यहीनता, लापरवाही और सरकारी आदेशों के उल्लंघन के आरोप में संजीव कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा पुलिस मुख्यालय को भेज दी है। अब मुख्यालय तय करेगा कि निलंबन, वेतन वृद्धि रोकने या अन्य कौन-सी कार्रवाई की जाएगी।