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रातभर सफर, सुबह परीक्षा; पुलिस भर्ती में दूर सेंटरों से बेहाल युवा

यूपी में पुलिस भर्ती परीक्षा में दूर दराज बनाए गए सेंटर व्यवस्था ने युवाओं को हलकान कर दिया है। रात भर सफर के बाद युवाओं को आराम करने तक का मौका नहीं मिल पा रहा है। सुबह की पाली में वाले अभ्यर्थियों को सबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ा है।

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प्रतीकात्मक फोटो। (Photo credit: chatgpt)

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यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए बुधवार को राजधानी लखनऊ में अभ्यर्थियों का सैलाब उमड़ पड़ा। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, अंबेडकरनगर, अयोध्या, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली और अमेठी समेत कई जिलों के हजारों अभ्यर्थी परीक्षा देने लखनऊ पहुंचे।

 

चारबाग रेलवे स्टेशन, आलमबाग बस टर्मिनल और शहर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही भारी भीड़ देखने को मिली। नकल और सॉल्वर गैंग पर रोक लगाने के लिए भर्ती बोर्ड ने बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को गृह जनपद से बाहर केंद्र आवंटित किए हैं। इसके चलते कई युवाओं को 200 से 400 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ा।

'रातभर ट्रेन में सफर, सीधे परीक्षा केंद्र पहुंचे'

गोरखपुर के आदित्य त्रिपाठी मंगलवार रात ट्रेन से लखनऊ पहुंचे। उन्होंने बताया कि परीक्षा सुबह की पाली में होने के कारण उन्हें रातभर सफर करना पड़ा। ट्रेन में इतनी भीड़ थी कि बैठने तक की जगह नहीं मिली। रातभर जागकर सफर किया और सुबह सीधे परीक्षा केंद्र पहुंचना पड़ा। 

नेहा के लिए परीक्षा से पहले सफर ही परीक्षा

देवरिया की नेहा यादव अपने पिता के साथ लखनऊ पहुंचीं। उन्होंने कहा कि दूर केंद्र मिलने से परिवार पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। अकेले आना सुरक्षित नहीं था। पापा को साथ आना पड़ा। किराया, खाना और रहने का खर्च मिलाकर काफी पैसा खर्च हो गया। 

 

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बलिया से आए रवि बोले- खर्च ने बढ़ाई चिंता

बलिया के रवि सिंह ने बताया कि उन्हें बस और ट्रेन दोनों का सहारा लेना पड़ा। एक परीक्षा के लिए दो हजार रुपये से ज्यादा खर्च हो गए। गरीब परिवार के अभ्यर्थियों के लिए यह बहुत बड़ी रकम है। 

आजमगढ़ के अरविंद ने उठाया सवाल

आजमगढ़ के अरविंद कुमार का कहना है कि नकल रोकने के लिए सख्ती जरूरी है, लेकिन केंद्र बहुत दूर नहीं होने चाहिए। अगर पड़ोसी जिले में केंद्र दिया जाए तो भी व्यवस्था बनी रहेगी और अभ्यर्थियों को इतनी परेशानी नहीं होगी। 

 

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स्टेशन, बस अड्डों और लॉज में बढ़ी भीड़

चारबाग रेलवे स्टेशन, आलमबाग बस अड्डा और कैसरबाग बस स्टेशन पर देर रात से ही अभ्यर्थियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। कई उम्मीदवारों ने रात प्लेटफॉर्म पर बिताई तो कई ने सस्ते लॉज और धर्मशालाओं का सहारा लिया। शहर के कई होटल भी परीक्षा के चलते भरे नजर आए।

क्यों दिए गए दूसरे जिलों में सेंटर?

भर्ती बोर्ड का कहना है कि पेपर लीक, फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वर गैंग पर रोक लगाने के लिए गृह जनपद से बाहर परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस रिकग्निशन और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था की गई है।

 

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युवाओं की मांग- सुविधा का भी रखा जाए ध्यान

अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, लेकिन केंद्र आवंटन में दूरी का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि गृह जिले की जगह नजदीकी जिले या मंडल मुख्यालय में केंद्र दिए जाएं ताकि आर्थिक और शारीरिक परेशानी कम हो।

वर्दी का सपना, सफर की चुनौती

लाखों युवाओं के लिए यूपी पुलिस भर्ती नौकरी पाने का बड़ा अवसर है, लेकिन इस बार परीक्षा से पहले ही लंबी यात्रा, भीड़ और बढ़ते खर्च ने अभ्यर्थियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। युवाओं का कहना है कि वर्दी पाने की इस दौड़ में अब केवल प्रश्नपत्र ही नहीं, बल्कि सैकड़ों किलोमीटर का सफर भी एक बड़ी परीक्षा बन गया है।

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