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‘मैं भी दिमागी नक्सल', पी. चिदंबरम के बयान पर क्यों भड़के रविशंकर प्रसाद?

BJP सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पी. चिदंबरम के 'मैं भी दिमागी नक्सल' बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदाराना और आपत्तिजनक बताया।

P Chidambaram, Ravi Shankar Prasad

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पी चिदंबरम और रविशंकर प्रसाद, Photo Credit-Chat GPT

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भारत के पूर्व केंद्रीय वित्त और गृह मंत्री पलानियाप्पन चिदंबरम के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पलटवार किया है। बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिहार के पटना में इसे गैर-जिम्मेदाराना और आपत्तिजनक बताया। चिदंबरम के बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी वार तेज हो गया है। 

 

रविशंकर ने कहा कि पी. चिदंबरम देश के पूर्व गृह मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का संदर्भ समझना चाहिए था। रविशंकर ने कांग्रेस पर नक्सलवाद-माओवाद के प्रति नरम रवैया रखने का आरोप भी लगाया है। 

 

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लाल किले से PM मोदी ने क्या दिया था संदेश?

15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने देश के सामने 2047 तक विकसित भारत का रोडमैप रखा था। इसी दौरान उन्होंने देश में माओवाद और नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता का जिक्र किया। PM ने कहा था कि सरकार की सख्त नीति की वजह से आज नक्सलवाद काफी हद तक खत्म हो चुका है। फिर भी कुछ लोगों के दिमाग में नक्सली सोच बनी हुई है। 

 

उन्होंने इसे मानसिक नक्सलवाद करार दिया था। प्रधानमंत्री के इसी बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा था कि अगर यही नक्सलवाद है तो मैं भी दिमागी रूप से नक्सली हूं।

चिदंबरम के इसी बयान से भड़के रविशंकर

चिदंबरम के इसी बयान पर रविशंकर प्रसाद भड़क गए। उन्होंने कहा कि एक पूर्व गृह मंत्री का इस तरह बयान देना देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चिदंबरम खुद गृह मंत्री रह चुके हैं। उन्हें पता होना चाहिए कि नक्सलवाद ने देश के कितने नौजवानों की जान ली है। कितने जवान शहीद हुए हैं। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर मजाक उड़ाना गैर-जिम्मेदाराना है। 

 

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने बीते 10 साल में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी है। आज बस्तर, दंतेवाड़ा और झारखंड के कई इलाकों में जहां कभी बंदूकें चलती थीं, वहां अब तिरंगा शान से लहरा रहा है।

अमित शाह की नीति से बदली तस्वीर

बीजेपी सांसद ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नीति की तारीफ की। उन्होंने कहा कि शाह के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास और सुरक्षा दोनों पर काम किया। प्रसाद ने कहा कि जिन इलाकों में कभी चुनाव प्रचार करना मुश्किल था, आज वहां लोकतंत्र मजबूत हुआ है।

 

स्कूल, अस्पताल और सड़कें बनी हैं। यह मोदी सरकार और अमित शाह की नीति का नतीजा है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि कांग्रेस का हमेशा से नक्सलवाद के प्रति नरम रवैया रहा है। प्रसाद के अनुसार दिमागी नक्सल और अर्बन नक्सल जैसे शब्द इसी सोच को दर्शाते हैं।

छत्तीसगढ़ की हिंसा को किया याद

रविशंकर प्रसाद ने छत्तीसगढ़ में अपने अनुभवों का जिक्र किया, कहा उन्होंने खुद वहां नक्सली हिंसा देखी है। हमारे कई बीजेपी कार्यकर्ता नक्सलियों की गोली का शिकार हुए। लेकिन हमने डरकर संघर्ष नहीं छोड़ा। लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ाई जारी रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को उन शहीदों के परिवारों के बारे में सोचना चाहिए जिनके घर उजड़ गए। ऐसे समय में ‘दिमागी नक्सल’ कहना उन शहीदों का अपमान है।

 

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वंदे मातरम को लेकर भी घेरा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर वंदे मातरम को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में कांग्रेस नेतृत्व ने वंदे मातरम के पूरे गायन पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ही स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई लड़ी थी। लेकिन आज उसी कांग्रेस का नेतृत्व राष्ट्रगीत का सम्मान नहीं कर रहा। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

रविशंकर ने कांग्रेस से देश से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रध्वज का सम्मान हर भारतीय का कर्तव्य है।

 

चिदंबरम के बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी वार तेज हो गया है। बीजेपी नेताओं ने सोशल मीडिया पर भी चिदंबरम के बयान की आलोचना की है। वहीं कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ने विपक्षी सोच वाले लोगों को निशाने पर लिया है। चिदंबरम ने उसी का जवाब दिया है।


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