उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की पंजाब नेशनल बैंक की चेस्ट करेंसी में 17 करोड़ रुपये के जाली नोट जमा कराने के मामले में पाकिस्तानी कनेक्शन सामने आया है। केंद्रीय जांच एजेंसी को जांच के दौरान कई अहम साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी इन साक्ष्यों की तस्दीक करने के साथ पुख्ता सबूत जुटाने में लगी है। मामले में एनआईए ने दो बैंक कर्मचारियों समेत पांच आरोपियों को जेल भेजा है।
बृहस्पतिवार को इनमें से मुकेश, राजेंद्र और नीतू को एक सप्ताह की कस्टडी रिमांड पर लिया गया। उनसे पूछताछ जारी है। सूत्रों के मुताबिक, जाली नोटों का जाल पाकिस्तान ने बिछाया है। इन नोटों की क्वालिटी सामान्य नकली करेंसी से अलग है और इनमें सिक्योरिटी थ्रेड भी है। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ समय पहले इसी तरह की नकली करेंसी नेपाल बॉर्डर से लाई गई थी। इस मामले में कासगंज निवासी दो युवकों को एटीएस ने गिरफ्तार किया था।
यह भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: 40 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल, कोर्ट में हंगामा
सप्लायर की तलाश तेज
17 करोड़ रुपये की जाली करेंसी लाना और उसे बैंक में जमा कराना कोई मामूली मामला नहीं है। अब तक की जांच में मुकेश की अहम भूमिका सामने आई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह पूरे मामले का मास्टरमाइंड है और जाली नोटों की सप्लाई करने वालों के सीधे संपर्क में था। जाली करेंसी सप्लाई करने वाले व्यक्ति के बारे में भी एजेंसियों को जानकारी मिली है। उसकी तलाश जारी है। एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क का दायरा बड़ा हो सकता है और मामले में आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
सहारनपुर के इस मामले के तार पाकिस्तान से जुड़े होने की जांच की जा रही है। देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिए पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।जांच में सामने आया है कि बरामद नोट आम नकली नोटों की तरह नहीं हैं। इनमें इस्तेमाल की गई सिक्योरिटी थ्रेड भी जांच एजेंसियों के लिए अहम बिंदु है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली करेंसी कहां तैयार हुई और किस नेटवर्क के जरिए भारत तक पहुंचाई गई।
यह भी पढ़ें: यूपी MLC चुनाव: 11 सीटों पर संग्राम, सपा कैसे बचाएगी नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी?
2024 में भी फेक करेंसी केस में पकड़ा गया था मुकेश
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी मुकेश कुमार वर्ष 2024 में भी जाली नोटों के मामले में गिरफ्तार हुआ था। उस समय उसके पास से दो लाख रुपये के जाली नोट बरामद हुए थे। उसके दो साथी भी दबोचे गए थे। हालांकि, मुकेश को जमानत पर रिहा कर दिया गया था। पुलिस की लचर कार्रवाई की वजह से उसे राहत मिली। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने कथित तौर पर फिर से जाली नोटों का धंधा शुरू कर दिया। अब 17 करोड़ रुपये की जाली करेंसी के मामले में उसका नाम सामने आने के बाद जांच एजेंसियां उसके पुराने नेटवर्क और संपर्कों को भी खंगाल रही हैं। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि 2024 के मामले और मौजूदा 17 करोड़ रुपये की जाली करेंसी के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं।