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पंचकूला: नगर निगम FD गबन केस में ED एंट्री, क्या बड़े अफसर नपेंगे?

पंचकुला नगर निगम में हुए कथित घोटाले की जांच अब ईडी करेगी। फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते में धांधली की बात सामने आई है।

Haryana

पंचकूला नगर निगम। Photo Credit: Nagar Nigam

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पंचकुला नगर निगम के फिक्स डिपॉजिट घोटाले की अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारी करेंगे। पंचकूला नगर निगम के एफडी में हुआ यह कथित घोटा करीब 160 करोड़ रुपये का है। FD स्कैम में, फर्जी दस्तावेज और फर्जी बैंक खातों के जरिए निगम के करोड़ों रुपये बिल्डरों के खातों में डायवर्ट करने का आरोप है। ईडी इस केस में फर्जीवाड़े आई रकम की पूरी छानबीन करने में जुटने वाली है। 

एफडी स्कैम के मुख्य आरोपी विकास कौशिक को बुधवार को पंचकुला कोर्ट में पेश किया जाएगा। विकास कौशिक पर नगर निगम में अकाउंट ऑफिसर के पद पर रहते हुए फर्जीवाड़ा करने का आरोप है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने उन्हें 5 दिनों तक रिमांड पर रखा था और पूछताछ की थी। अब उन्हें एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारी कोर्ट में पेश करेंगे। 

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विकास कौशिक पर क्या आरोप हैं?

विकास कौशिक पर आरोप है कि उन्होंने कोटक महिंद्रा बैंक, सेक्टर-11 के मैनेजर पुष्पेंद्र के साथ मिलीभगत की। मई 2020 में उन्होंने निगम के नाम पर एक फर्जी बैंक खाता खोला। इस खाते को वैध दिखाने के लिए तत्कालीन आयुक्त सुमेधा कटारिया (IAS) और सीनियर अकाउंट ऑफिसर सुशील कुमार के जाली हस्ताक्षर और मोहरें बनाई गईं। जून 2022 में एक और फर्जी खाता खोला गया, जिसमें तत्कालीन DMC दीपक सुरा के जाली हस्ताक्षर किए गए।

पैसे कैसे गायब हुए?

नगर निगम की असली FD को समय से पहले तोड़ दिया जाता था। इसके लिए फर्जी डेबिट नोट, RTGS/NEFT का इस्तेमाल किया जाता था। पैसा पहले निगम के नाम पर खुले फर्जी खातों में ट्रांसफर किया जाता था। फिर वहां से रजत ढाहरा, स्वाति तोमर और अन्य बिचौलियों के खातों के जरिए सीधे निजी बिल्डरों के खातों में भेज दिया जाता था।

 

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घोटाला कैसे सामने आया?

नगर निगम ने ऑडिट के लिए बैंक से अपनी जमा राशि का विवरण मांगा तो सच सामने आ गया। 22 फरवरी 2026 को बैंक ने एक ऐसी जानकारी दी जो निगम के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती थी।13 मार्च 2026 को  बैंक ने बताया कि खाते में सिर्फ 2.17 करोड़ रुपये बचे हैं, जबकि रिकॉर्ड में 50.07 करोड़ होने चाहिए थे। 16 मार्च 2026 को बैंक ने लिखित में बताया कि निगम की कोई लाइव FD ही नहीं बची है। इस तरह करीब 48 करोड़ रुपये गायब पाए गए। निगम ने फरवरी-मार्च 2025 में बड़ी रकम FD में लगाई थी, जो 2026 में मैच्योर होनी थी। आरोपियों ने इन्हीं FD को निशाना बनाया। 

अब आगे क्या?

ACB अब अन्य आरोपियों और बिल्डरों की भूमिका की भी जांच कर रही है। ED के आने से घोटाले की गहराई और ज्यादा खुलने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

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